Friday, October 2, 2026

सोशल मीडिया पर कुर्बानी की फोटो-वीडियो डालने पर जमीयत की बड़ी अपील!



मुजफ्फरनगर।
ईद उल अजहा से पहले जमीयत उलमा-ए-हिंद जिला मुजफ्फरनगर की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक में समाज में अमन, भाईचारे और कानून व्यवस्था बनाए रखने को लेकर गंभीर मंथन किया गया। बैठक में साफ तौर पर अपील की गई कि कुर्बानी से जुड़ी किसी भी प्रकार की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड न की जाए, क्योंकि इससे माहौल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है और असामाजिक तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

अंबा विहार स्थित मदीना गार्डन में आयोजित इस विशेष बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष मौलाना मुकर्रम अली क़ासमी ने की, जबकि संचालन मौलाना अब्दुल खालिक क़ासमी ने किया। बैठक में जिले भर की सभी यूनिटों के पदाधिकारी मौजूद रहे और ईद उल अजहा को शांतिपूर्ण, जिम्मेदारीपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर मनाने पर जोर दिया गया।

जिला अध्यक्ष मौलाना मुकर्रम अली क़ासमी ने कहा कि ईद उल अजहा केवल कुर्बानी का पर्व नहीं बल्कि त्याग, इंसानियत, भाईचारे और अल्लाह की रज़ा हासिल करने का संदेश देने वाला मुकद्दस त्योहार है। उन्होंने कहा कि हर मुसलमान की जिम्मेदारी है कि वह शरीयत और देश के कानून दोनों का पूरी तरह पालन करे तथा ऐसा कोई काम न करे जिससे दूसरे समुदाय की भावनाएं आहत हों या समाज में तनाव पैदा हो।

उन्होंने बेहद गंभीरता से कहा कि आज सोशल मीडिया पर छोटी-सी लापरवाही भी बड़े विवाद का कारण बन जाती है। इसलिए कुर्बानी के दौरान फोटो खींचना, वीडियो बनाना या उन्हें वायरल करना पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर ऐसे वीडियो को गलत तरीके से फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, इसलिए सभी लोग जिम्मेदारी का परिचय दें और संयम बरतें।

बैठक में यह भी कहा गया कि ईद उल अजहा को अमन, भाईचारे और इंसानी संवेदनाओं के साथ मनाया जाए। जमीयत पदाधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वह अपने आसपास साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और कुर्बानी के अवशेष निर्धारित स्थानों पर ही डालें ताकि किसी को परेशानी न हो और शहर का माहौल स्वच्छ बना रहे।

संगठन को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मौलाना मुकर्रम अली क़ासमी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद हमेशा से देश में भाईचारा, इंसाफ और संविधान की मजबूती के लिए काम करती रही है। उन्होंने गांव, कस्बे और वार्ड स्तर तक नई यूनिटों के गठन और युवाओं को संगठन से जोड़ने की अपील की। उनका कहना था कि मजबूत संगठन ही समाज की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाकर लोगों की मदद कर सकता है।

बैठक में आगामी जनगणना को लेकर भी चर्चा हुई। लोगों से अपील की गई कि जनगणना के दौरान सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं, क्योंकि यह देश की योजनाओं और विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे लोगों में जागरूकता फैलाएं और जनगणना प्रक्रिया में सहयोग का माहौल बनाएं।

बैठक के दौरान जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष Maulana Arshad Madani द्वारा गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का सर्वसम्मति से समर्थन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश में आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से पूरी तरह बचना चाहिए और कानून का पालन हर हाल में जरूरी है।

इसके अलावा समाज सुधार कार्यक्रमों को गांव-गांव और मोहल्लों तक पहुंचाने का भी फैसला लिया गया। नशामुक्ति अभियान, शिक्षा जागरूकता, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान और युवाओं को सकारात्मक दिशा देने जैसे विषयों पर लगातार कार्यक्रम चलाने की बात कही गई।

बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों ने संकल्प लिया कि ईद उल अजहा को अमन, भाईचारे, सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक मर्यादाओं के साथ मनाने का संदेश हर घर तक पहुंचाया जाएगा। बैठक में मौलाना अहमद, मुफ्ती तन्मीक, हाजी अजीजुर्रहमान, मौलाना आसिफ कुरैशी बुढ़ाना, मुफ्ती निशात, हाजी शराफत अली, मौलाना खालिद, मुफ्ती आजाद, मौलाना सनव्वर क़ासमी, मौलाना मोनिस, मौलाना अब्दुल कय्यूम, मुफ्ती नावेद, क़ारी मुजफ्फरुल्लाह, मौलाना शाहनवाज, मौलाना शाह आलम, मौलाना इसराइल, मौलाना सादिक, हाफिज तहसीन, मौलाना सुहैल अख्तर और मौलाना अब्दुल्लाह समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।

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