संघर्ष का सम्मान: प्रमोद त्यागी की ऐतिहासिक जीत, अधिवक्ताओं ने सौंपा नेतृत्व।
खबर पश्चिम उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के वर्ष 2026-27 के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया कि बार के अधिवक्ता इस बार केवल एक अध्यक्ष नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले मजबूत नेतृत्व को चुनना चाहते थे। यही कारण रहा कि वर्षों से अधिवक्ताओं की आवाज बनकर संघर्ष करने वाले प्रमोद त्यागी ने अध्यक्ष पद पर 602 वोट हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और बार की सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी पर अपना अधिकार स्थापित किया।
यह जीत केवल मतों की संख्या नहीं, बल्कि उस विश्वास की जीत है जो अधिवक्ताओं ने प्रमोद त्यागी के संघर्ष, निडरता और उनके समर्पण पर जताया है। कचहरी परिसर में जैसे ही अंतिम परिणाम घोषित हुआ, समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। चारों ओर नारे गूंज उठे, फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया गया और अधिवक्ताओं ने इसे अपने सम्मान की जीत बताया।
वकीलों की आवाज बने, उसी का मिला इनाम
प्रमोद त्यागी को बार में एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है, जो अधिवक्ताओं के हक की लड़ाई लड़ने के लिए किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटते। चाहे अधिवक्ताओं के सम्मान का मुद्दा हो, सुविधाओं का सवाल हो या किसी अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी हो—प्रमोद त्यागी हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आए।
बार के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रमोद त्यागी ने कभी समझौते की राजनीति नहीं की, बल्कि हमेशा अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों को सर्वोपरि रखा। यही वजह रही कि जब चुनाव का समय आया, तो अधिवक्ताओं ने बिना किसी संकोच के उन्हें अपना नेता चुना।
कड़े मुकाबले में दर्ज की निर्णायक जीत
अध्यक्ष पद पर मुकाबला बेहद कड़ा था। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी मौ० अंजुम खान को 543 वोट मिले, जबकि अनिल जिंदल को 508 वोट प्राप्त हुए। इसके अलावा सुरेंद्र पाल मैनवाल को 177 और अर्जुन सिंह को 57 वोट मिले।
लेकिन शुरुआत से लेकर अंतिम राउंड तक प्रमोद त्यागी की स्थिति मजबूत बनी रही और अंत में उन्होंने निर्णायक बढ़त के साथ जीत दर्ज कर दी।
यह जीत उम्मीदों और भरोसे की जीत है
प्रमोद त्यागी की जीत को बार में एक बड़े बदलाव और मजबूत नेतृत्व की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अधिवक्ताओं का मानना है कि अब बार को एक ऐसा अध्यक्ष मिला है, जो उनकी समस्याओं को न केवल समझता है बल्कि उनके समाधान के लिए संघर्ष करना भी जानता है।
जीत के बाद भावुक हुए प्रमोद त्यागी
अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद प्रमोद त्यागी ने सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि हर उस अधिवक्ता की जीत है, जिसने उन पर भरोसा किया।
उन्होंने कहा कि—
“मैंने हमेशा अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आगे भी करता रहूंगा। यह जिम्मेदारी मेरे लिए पद नहीं, बल्कि सेवा का अवसर है। मैं बार के हर अधिवक्ता के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी ताकत से काम करूंगा।”
भारी मतदान ने दिखाया विश्वास
इस चुनाव में कुल 2382 मतदाताओं में से 1911 अधिवक्ताओं ने मतदान किया, जो करीब 80 प्रतिशत रहा। यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि अधिवक्ता इस बार नेतृत्व को लेकर कितने गंभीर और जागरूक थे।
संघर्ष से शिखर तक का सफर
प्रमोद त्यागी की जीत को उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है। अधिवक्ताओं के बीच उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है, जो हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा रहता है। यही कारण है कि इस बार बार एसोसिएशन की कमान उन्हें सौंपकर अधिवक्ताओं ने साफ संदेश दिया है कि अब नेतृत्व संघर्ष करने वालों के हाथ में है।
अब सबकी नजर उनके कार्यकाल पर
प्रमोद त्यागी के अध्यक्ष बनने के बाद अब अधिवक्ताओं की उम्मीदें भी उनसे जुड़ गई हैं। अधिवक्ताओं को विश्वास है कि उनका नया अध्यक्ष न केवल उनके सम्मान की रक्षा करेगा, बल्कि बार को नई ऊंचाइयों तक भी ले जाएगा।
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के इतिहास में यह जीत एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है—एक ऐसे अध्यक्ष की जीत, जिसने संघर्ष को अपना रास्ता बनाया और अधिवक्ताओं के दिलों में अपनी जगह बनाई।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

