Friday, October 2, 2026

संघर्ष और संगठन की पहचान बने अब्दुल्ला कुरैशी, सपा ने दूसरी बार सौंपी बड़ी जिम्मेदारी!



मुज़फ्फरनगर की सियासत में समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर बड़ा और अहम संदेश देते हुए अब्दुल्ला कुरैशी पर भरोसा जताया है। लगातार संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने और पार्टी की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले अब्दुल्ला कुरैशी को दूसरी बार समाजवादी अल्पसंख्यक सभा का ज़िलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस फैसले के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इस नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति और प्रदेश नेतृत्व की संस्तुति पर लिया गया यह फैसला साफ तौर पर दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व अब्दुल्ला कुरैशी के कार्यों, उनके संघर्ष और संगठन के प्रति उनकी निष्ठा से पूरी तरह संतुष्ट है। यही कारण है कि मुज़फ्फरनगर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जनपद में एक बार फिर उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जारी मनोनयन पत्र के अनुसार समाजवादी अल्पसंख्यक सभा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व राज्य मंत्री मोहम्मद शकील नदवी ने 25 मई 2026 को यह नियुक्ति पत्र जारी किया। पत्र में मोहल्ला बेरियान, कस्बा जानसठ निवासी अब्दुल्ला कुरैशी को समाजवादी अल्पसंख्यक सभा जनपद मुज़फ्फरनगर का जिलाध्यक्ष नामित किया गया है। साथ ही उन्हें पार्टी संविधान के अनुसार 15 दिनों के भीतर जिला कमेटी गठित कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब्दुल्ला कुरैशी लंबे समय से समाजवादी पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर कार्य कर रहे हैं। चाहे संगठन को मजबूत करने की बात हो, अल्पसंख्यक समाज की आवाज उठाने की बात हो या फिर पार्टी की नीतियों को जनता तक पहुंचाने का काम — उन्होंने हर मोर्चे पर मजबूती के साथ काम किया है। यही वजह है कि कार्यकर्ताओं के बीच उनकी अलग पहचान बनी हुई है।

बताया जाता है कि अपने पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार मेहनत की। गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं को जोड़ा, युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम किया और हर छोटे-बड़े कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई। पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय मौजूदगी और कार्यकर्ताओं के प्रति उनका व्यवहार हमेशा चर्चा का विषय रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब्दुल्ला कुरैशी हमेशा जमीन से जुड़े नेता रहे हैं और हर कार्यकर्ता की बात गंभीरता से सुनते हैं।

समाजवादी पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव तक लगातार उनके कार्यों की सकारात्मक रिपोर्ट पहुंच रही थी। मुज़फ्फरनगर में संगठन को सक्रिय रखने और पार्टी की पकड़ मजबूत करने में उनकी भूमिका को देखते हुए ही नेतृत्व ने दोबारा उन पर भरोसा जताया है। इसे आने वाले राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नियुक्ति की खबर सामने आते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई और इसे संगठन के मेहनती कार्यकर्ता का सम्मान बताया। समर्थकों का कहना है कि यह जिम्मेदारी केवल एक पद नहीं बल्कि वर्षों के संघर्ष, मेहनत और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुज़फ्फरनगर में समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक समाज के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है और ऐसे में अब्दुल्ला कुरैशी की नियुक्ति पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश भी मानी जा रही है। आने वाले समय में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दूसरी बार जिम्मेदारी मिलने के बाद अब्दुल्ला कुरैशी संगठन को किस तरह नई दिशा देते हैं और आगामी राजनीतिक माहौल में पार्टी को कितनी मजबूती दिलाते हैं।

जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

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