मुजफ्फरनगर। पौराणिक तीर्थनगरी शुक्रताल में गंगा की मुख्य धारा में जल की भारी कमी और घाटों पर फैली गंदगी को लेकर संत समाज का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। गंगा घाट पर एकत्रित हुए साधु-संतों ने शासन और प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए दो दिन के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की है। संतों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
गंगा घाट पर आयोजित संत समाज की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शुक्रताल जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र की लगातार उपेक्षा की जा रही है। संतों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से शासन और प्रशासन द्वारा यह आश्वासन दिया जाता रहा है कि गंगा की मुख्य धारा को शुक्रताल तक लाया जाएगा और घाटों की स्थिति में सुधार किया जाएगा, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कदम दिखाई नहीं दे रहा है। परिणामस्वरूप आज गंगा घाट पर जल का स्तर बेहद कम हो गया है और कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
संतों ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुक्रताल पहुंचते हैं, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। गंगा में पर्याप्त जल न होने के कारण अनेक श्रद्धालु स्नान किए बिना ही लौटने को मजबूर हैं। इससे न केवल श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है, बल्कि तीर्थनगरी की धार्मिक गरिमा और प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
बैठक में संत समाज ने गंगा घाट पर बनाए जा रहे आरती स्थल को लेकर भी कड़ा विरोध जताया। संतों का कहना है कि जब गंगा में पर्याप्त जल ही उपलब्ध नहीं है तो ऐसे निर्माण कार्यों का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने मांग की कि आरती स्थल के निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और सबसे पहले गंगा की अविरल एवं पर्याप्त धारा को शुक्रताल तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
संतों ने कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि वास्तविक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। गंगा घाटों की सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवनरेखा है। ऐसे में उसकी उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
संत समाज ने शासन और प्रशासन को दो दिन का स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि के भीतर गंगा में पर्याप्त जल उपलब्ध कराने, घाटों की सफाई कराने और उनकी अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई तो संत समाज व्यापक जनसमर्थन के साथ बड़ा आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा।
शुक्रताल में गंगा के जलस्तर और घाटों की बदहाल स्थिति को लेकर उठी यह आवाज अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। संतों की चेतावनी के बाद सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

