मेरठ। विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर जहां देशभर में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, वहीं मेरठ में आयोजित एक विशाल रक्तदान शिविर ने मानवता, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी की ऐसी मिसाल पेश की जिसने यह साबित कर दिया कि रक्तदान वास्तव में सबसे बड़ा महादान है। इस शिविर में 350 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर अनगिनत जरूरतमंद मरीजों के जीवन की रक्षा का संकल्प लिया।
भोला रोड स्थित श्री हरि भवन मंडप में आयोजित इस विशाल रक्तदान शिविर में केवल मेरठ ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, दिल्ली, गुरुग्राम सहित आसपास के कई जिलों से भी बड़ी संख्या में रक्तदाता पहुंचे। दूर-दराज से आए युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान कर यह संदेश दिया कि किसी अनजान व्यक्ति की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।
इस रक्तदान शिविर का आयोजन जीवनदान फाउंडेशन के अध्यक्ष सोनू शर्मा के नेतृत्व में किया गया। कोविड-19 महामारी के कठिन समय में शुरू हुई यह पहल आज एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। संस्था का उद्देश्य स्पष्ट है कि केवल रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज की जान न जाए। इसी सोच के साथ संस्था लगातार जरूरतमंदों तक समय पर रक्त पहुंचाने का कार्य कर रही है और हजारों स्वयंसेवक इस मिशन से जुड़ चुके हैं।
जीवनदान फाउंडेशन के अध्यक्ष सोनू शर्मा स्वयं समाज के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। वे अब तक 150 बार रक्तदान कर चुके हैं, जिसके कारण लोग उन्हें “रक्तवीर” के नाम से जानते हैं। उनका कहना है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि किसी परिवार की उम्मीद, किसी मां की मुस्कान और किसी मरीज के जीवन को बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है। उनका मानना है कि हर स्वस्थ व्यक्ति को नियमित रूप से रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि एक यूनिट रक्त कई लोगों के जीवन को बचा सकता है।
विश्व रक्तदान दिवस पर आयोजित यह शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि मानवता के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। यहां पहुंचे सैकड़ों रक्तदाताओं ने यह साबित किया कि समाज की असली ताकत सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता में छिपी होती है। रक्त की एक-एक बूंद उन मरीजों के लिए नई जिंदगी लेकर आएगी जो अस्पतालों में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
मेरठ में आयोजित यह विशाल रक्तदान शिविर समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। इस आयोजन ने लोगों को यह संदेश दिया कि रक्तदान करने से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है। जरूरत के समय दिया गया रक्त किसी व्यक्ति के लिए नया जीवन बन सकता है और यही इस महादान की सबसे बड़ी शक्ति है।

