खबर पश्चिम उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।
यूजीसी कानून को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विरोध के स्वर लगातार तेज होते जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर जनपद के रोनी हरजीपुर गांव में बुधवार को इस विरोध ने एक असामान्य और गंभीर रूप ले लिया, जब ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अपने खून से पत्र लिखकर कानून को वापस लेने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि यूजीसी कानून समाज में विभाजन पैदा कर सकता है और इससे छात्रों के बीच जातिगत दूरी बढ़ने का खतरा है। उनका आरोप है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था में समानता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देगा, जिसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ेगा।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि गांव में सभी वर्गों और बिरादरियों के लोग लंबे समय से आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं, लेकिन यदि इस तरह के कानून लागू होते हैं, तो समाज में टकराव और असंतोष की स्थिति बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज को बांटने वाले किसी भी निर्णय का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा।
ग्रामीण अंकुर राणा ने कहा कि यूजीसी कानून का प्रभाव विशेष रूप से स्वर्ण समाज के छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा के नाम पर कुछ वर्गों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जिससे छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है। इसी भावना के तहत गांव के जिम्मेदार लोगों ने एकजुट होकर प्रधानमंत्री के नाम अपने रक्त से पत्र लिखा।
ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र सरकार हिंदू समाज की एकता की बात करती है, लेकिन यदि कोई कानून समाज में जातिगत विभाजन को बढ़ावा देता है, तो वह देश और समाज दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उनका कहना है कि यह विरोध किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों और समाज के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि यूजीसी कानून पर पुनर्विचार किया जाए और इसे वापस लिया जाए, ताकि समाज में सौहार्द बना रहे और छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

