खबर उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।
मुज़फ्फरनगर जनपद के गन्ना किसानों के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। वर्षों से जर्जर व्यवस्था, कम पेराई क्षमता, भुगतान में देरी और घाटे से जूझ रही दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड, मोरना को आखिरकार वह संजीवनी मिल गई है, जिसका इंतज़ार पूरा इलाका कर रहा था। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹261.91 करोड़ की स्वीकृति के साथ मोरना शुगर मिल के विस्तारीकरण और आधुनिकीकरण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इसी ऐतिहासिक निर्णय पर आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का क्षेत्र की जनता और किसानों की ओर से आभार व्यक्त किया गया।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिजनौर सांसद चंदन चौहान, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, स्थानीय विधायक मिथिलेश पाल तथा राष्ट्रीय लोक दल के वरिष्ठ कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम का माहौल भावुक भी था और उम्मीदों से भरा भी—क्योंकि यह फैसला सिर्फ एक मिल के विस्तार का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका और पूरे क्षेत्र के आर्थिक भविष्य का सवाल है।
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छोटी मिल, बड़ी समस्या: वर्षों से अटका था किसानों का हक
मोरना शुगर मिल गन्ना बाहुल्य क्षेत्र में स्थित है, लेकिन इसकी पेराई क्षमता लंबे समय से किसानों की जरूरतों के अनुरूप नहीं रही। वर्तमान में महज़ 2500 TCD क्षमता वाली यह मिल वर्ष 1995-96 के बाद से किसी बड़े तकनीकी विस्तार से वंचित रही। नतीजा यह हुआ कि आसपास के गांवों से आने वाला गन्ना समय पर पेराई नहीं हो पाता था। किसानों को या तो लंबा इंतज़ार करना पड़ता था या फिर दूसरे जनपदों की मिलों की ओर रुख करना पड़ता था। इससे परिवहन लागत बढ़ती, गन्ना सूखने का जोखिम रहता और कई बार भुगतान में देरी से किसान आर्थिक दबाव में आ जाते।
पुरानी मशीनरी, कम रिकवरी और बढ़ती लागत ने मिल की वित्तीय स्थिति को भी कमजोर कर दिया था। घाटे की यह स्थिति किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रही थी—एक तरफ समय पर पेराई नहीं, दूसरी तरफ भुगतान की अनिश्चितता।
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MLA से MP तक: चंदन चौहान का ‘मोरना मिशन’
मोरना शुगर मिल के कायाकल्प की यह कहानी किसी एक दिन की नहीं है। चंदन चौहान जब मीरापुर विधानसभा से विधायक थे, तभी उन्होंने सदन में इस मिल की बदहाली और किसानों की परेशानी को मजबूती से उठाया। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट कहा था कि “गन्ना किसान की मेहनत का पूरा मूल्य मिलना चाहिए, और इसके लिए मिल की क्षमता बढ़ाना ज़रूरी है।”
विधायक रहते हुए उन्होंने शासन स्तर पर प्रस्ताव रखवाया, तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कराई और कानूनी व प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने की दिशा में लगातार प्रयास किए। सांसद बनने के बाद भी यह मुद्दा उनकी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रहा। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक, हर मंच पर उन्होंने मोरना मिल के विस्तार की ज़रूरत को तथ्यों और आंकड़ों के साथ रखा।
आज जब पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) ने ₹261.91 करोड़ की लागत को मंज़ूरी दे दी है और मंत्रिपरिषद की 10 पन्नों की विस्तृत टिप्पणी सामने आ चुकी है, तो यह साफ है कि यह परियोजना अब सिर्फ कागज़ों में नहीं, बल्कि धरातल पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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₹261 करोड़ की योजना: कैसे बदलेगी मोरना मिल की तस्वीर
सरकार द्वारा स्वीकृत योजना के अनुसार, इस परियोजना की कुल लागत ₹261.91 करोड़ निर्धारित की गई है। हालांकि डीपीआर (DPR) में अनुमानित लागत ₹275.65 करोड़ आंकी गई थी, लेकिन विस्तृत मूल्यांकन के बाद PIB ने संशोधित लागत को मंज़ूरी दी।
वित्त पोषण मॉडल भी स्पष्ट है—
50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की अंशपूँजी (Equity) के रूप में
50 प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा ऋण (Loan) के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी
इस संतुलित वित्तीय ढांचे से परियोजना पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़ेगा और समयबद्ध तरीके से काम पूरा किया जा सकेगा।
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2500 से 5000 TCD: क्षमता दोगुनी, भरोसा चौगुना
नई योजना के तहत मोरना शुगर मिल की पेराई क्षमता 2500 TCD से बढ़ाकर 5000 TCD की जाएगी। यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं है, बल्कि इससे पूरे गन्ना चक्र में बदलाव आएगा।
किसानों का गन्ना तेज़ी से पेराई होगा
लाइन और इंतज़ार की समस्या खत्म होगी
मिल को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति मिलेगी
इसके साथ ही नई मिल Latest Technology पर आधारित होगी। आधुनिक बॉयलर, टरबाइन और प्रोसेसिंग यूनिट्स से ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी और उत्पादन लागत घटेगी।
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रिकवरी 11.50% तक: हर किसान को सीधा फायदा
मंत्रिपरिषद टिप्पणी के अनुसार, नई तकनीक के साथ मिल का लक्ष्य चीनी परता (Recovery) को 11.50 प्रतिशत तक ले जाना है। रिकवरी बढ़ने का सीधा मतलब है—
उसी मात्रा के गन्ने से अधिक चीनी उत्पादन
मिल की आय में बढ़ोतरी
और अंततः किसानों को समय पर और सुरक्षित भुगतान
यह बदलाव किसानों के लिए केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक राहत भी लेकर आएगा।
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रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट
मोरना शुगर मिल का आधुनिकीकरण केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा।
निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय मज़दूरों और तकनीशियनों को काम मिलेगा
प्लांट चालू होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों रोज़गार सृजित होंगे
परिवहन, मरम्मत, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों को भी गति मिलेगी
इससे पूरा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा गया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं ने एक स्वर में इसे किसानों की जीत बताया।
चंदन चौहान ने कहा—
> “मोरना मिल के किसानों की समस्या मेरी अपनी समस्या थी। मीरापुर के विधायक रहते हुए जो संकल्प लिया था, वह आज साकार हो रहा है। यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस अन्नदाता की है जिसने धैर्य और विश्वास बनाए रखा।”
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि समय पर क्रियान्वयन है। स्थानीय विधायक मिथिलेश पाल ने इसे क्षेत्र के विकास का टर्निंग पॉइंट बताया।
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क्यों गंभीर है यह फैसला
यह फैसला इसलिए भी गंभीर और ऐतिहासिक है क्योंकि—
यह गन्ना किसानों की दशकों पुरानी मांग को पूरा करता है
क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग को मज़बूती देता है
सरकारी निवेश का सकारात्मक सामाजिक प्रभाव दिखाता है
मोरना शुगर मिल अब केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनने जा रही है।
₹261 करोड़ की इस मंज़ूरी के साथ मोरना शुगर मिल के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। यह अध्याय संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयासों की कहानी कहता है—जहां किसानों की आवाज़ को सुना गया और उसे नीति में बदला गया। आने वाले समय में जब 5000 TCD क्षमता वाली आधुनिक मिल पूरी क्षमता से चलेगी, तब इसका लाभ सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर किसान के चेहरे की मुस्कान में दिखाई देगा।
> मोरना मिल अब सिर्फ मिल नहीं, उम्मीद है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

