मदद पर मुकदमा? कोटद्वार में पुलिस की कार्रवाई सवालों में।
उत्तराखंड के कोटद्वार से 26 जनवरी की एक घटना ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद मामला गरमा गया है। वीडियो में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार को कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा नाम बदलने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान दुकानदार की मदद के लिए आगे आए दीपक कुमार और विजय रावत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दी।
बताया जा रहा है कि दबाव बनाने वाले कुछ लोग खुद को दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़ा बताते थे। वीडियो सामने आते ही जनाक्रोश बढ़ा और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। लोगों का सवाल है कि जिसने बुजुर्ग दुकानदार की मदद की, उसी पर केस क्यों दर्ज किया गया?
स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि विवाद के दौरान दीपक कुमार और विजय रावत ने स्थिति को शांत करने और दुकानदार की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप किया। इसके बावजूद पुलिस द्वारा उन्हीं पर मुकदमा दर्ज किया जाना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
मामले को लेकर पुलिस की ओर से अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार घटना की जांच जारी है और वीडियो सहित सभी पहलुओं को देखा जा रहा है। लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या मदद करना अपराध बन गया है?
सोशल मीडिया पर लगातार मांग उठ रही है कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे, दबाव बनाने वालों की भूमिका स्पष्ट करे और जिन पर गलत तरीके से मुकदमा दर्ज हुआ है, उन्हें राहत दे। फिलहाल, यह मामला कानून-व्यवस्था के साथ-साथ न्याय और संवेदनशीलता की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती बन गया है।

