Thursday, October 1, 2026

मुजफ्फरनगर में सियासी टकराव गहराया: मंत्री-विधायक की जुबानी जंग पहुंची पंचायत तक, 2027 में जवाब देने का ऐलान।

मुजफ्फरनगर में सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और सपा विधायक पंकज मलिक के बीच शुरू हुई जुबानी जंग अब समर्थकों और आम लोगों के बीच पहुंच गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि यह विवाद अब गांव की पंचायत तक जा पहुंचा है और आने वाले चुनावों तक असर दिखाने के संकेत दे रहा है।

इस पूरे विवाद की शुरुआत हाल ही में उस समय हुई जब यूपी सरकार में रालोद कोटे से कैबिनेट मंत्री बने अनिल कुमार ने समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर टिप्पणी की। मंत्री के इस बयान के बाद सपा खेमे में नाराजगी देखने को मिली।

मंत्री के बयान का जवाब देते हुए सपा विधायक पंकज मलिक ने कांशीराम जयंती के मौके पर मंच से तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंत्री अनिल कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें गुंडा और अहंकारी तक कह दिया। इसके बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया।

विवाद बढ़ने पर कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह दलित समाज से आते हैं और इसी वजह से उनके खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्री के इस बयान ने सियासी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।

इसके बाद मंत्री समर्थकों ने सपा विधायक पंकज मलिक का पुतला दहन कर अपना विरोध जताया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चर्चा को और तेज कर दिया और मामला अब केवल नेताओं तक सीमित नहीं रहा।

पुतला दहन के विरोध में अब सपा विधायक पंकज मलिक के समर्थन में पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र के गांव पचेड़ा कला में एक पंचायत आयोजित की गई। इस पंचायत में आसपास के कई गांवों के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

पंचायत में वक्ताओं ने पुतला दहन की घटना पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे अपमानजनक बताया। लोगों ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक नेता का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और समाज के सम्मान का सवाल है।

पंचायत में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर कहा कि इस पूरे मामले का जवाब आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में दिया जाएगा। इस दौरान लोगों में मंत्री के खिलाफ नाराजगी साफ तौर पर दिखाई दी।

कुल मिलाकर, मुजफ्फरनगर में मंत्री और विधायक के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग अब एक बड़े सियासी संघर्ष का रूप लेती नजर आ रही है। जिस तरह से यह मामला पंचायत तक पहुंचा है, उससे साफ है कि आने वाले समय में यह विवाद और भी गहराने की संभावना है।

बयानबाजी से शुरू हुआ विवाद अब जनभावनाओं से जुड़ चुका है, और इसका असली असर 2027 के चुनाव में देखने को मिल सकता है।


अब हम आपको सुनते हैं दोनों नेताओं के बयान समर्थकों के बयान पंचायत में समर्थकों ने क्या कहा।




बरहाल आपका इस पूरी खबर को लेकर क्या कुछ कहना है अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

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