Friday, October 2, 2026

मुजफ्फरनगर में पर्यावरण बचाने की बड़ी मुहिम, 5 लाख पौधे रोपे गए।







गंगा तट से अभयारण्य तक चला विशाल अभियान, प्लास्टिक पर सख्ती, नदियों-तालाबों और वन्यजीवों के संरक्षण का लिया गया संकल्प

मुजफ्फरनगर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुजफ्फरनगर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अभूतपूर्व और व्यापक अभियान चलाया गया। वन विभाग और सामाजिक वानिकी प्रभाग के नेतृत्व में जिलेभर में 5 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान गंगा नदी, सोलानी नदी, आर्द्रभूमियों (वेटलैंड), वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

शुकतीर्थ क्षेत्र में सुबह से ही बड़े स्तर पर अभियान की शुरुआत हुई। मां गंगा के दोनों किनारों पर 1100 पौधे लगाए गए। इसके अलावा जलालपुर बेहद क्षेत्र में 16 हजार पौधों का रोपण कर हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी रहा।

पौधारोपण के बाद गंगा तट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस दौरान प्लास्टिक, पॉलिथीन, बोतलें और अन्य कचरे को हटाकर गंगा को स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि गंगा और उसके तटीय क्षेत्रों को प्रदूषण मुक्त बनाना सभी की जिम्मेदारी है।

सुखदेव आश्रम, शुकतीर्थ में पर्यावरण शुद्धि और विश्व कल्याण की कामना के साथ वैदिक यज्ञ एवं हवन का आयोजन किया गया। संत-महात्माओं ने प्रकृति संरक्षण को भारतीय संस्कृति का मूल आधार बताते हुए पर्यावरण बचाने का आह्वान किया।

इसके बाद शुकतीर्थ में विशाल पर्यावरण जागरूकता रैली निकाली गई। संत समाज के पूज्य महाराज ओंकारानंद जी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली में छात्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया।

मोरना विकासखंड क्षेत्र में अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत सिंगल यूज प्लास्टिक और अन्य प्लास्टिक उत्पादों के उपयोग एवं बिक्री को रोकने के लिए विशेष परिचर्चा आयोजित की गई। जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ग्राम प्रधानों, दुकानदारों और ग्रामीणों को प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

सोलानी नदी तट पर वन विभाग ने कछुओं और मगरमच्छों जैसे जलीय जीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए विशेष संरक्षण गतिविधियां संचालित कीं। अधिकारियों ने कहा कि नदी तंत्र और जैव विविधता को सुरक्षित रखना पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी है।

कार्यक्रम के दौरान चौरावाला और विमलाखेड़ी तालाब को वेटलैंड घोषित किए जाने पर ग्रामीणों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। लोगों को बताया गया कि आर्द्रभूमियां भूजल संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्राम प्रधान श्रीमती आबिदा परवीन को वेटलैंड संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित लोगों ने नदियों, वनों, वन्यजीवों और आर्द्रभूमियों के संरक्षण की सामूहिक शपथ ली। सभी ने आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित प्राकृतिक संसाधन छोड़ने का संकल्प लिया।

प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग मुजफ्फरनगर ने बताया कि विश्व पर्यावरण दिवस पर जिले में 5 लाख से अधिक पौधे लगाए गए, जबकि वन विभाग का लक्ष्य 18 हजार पौधों का था, जिसमें से 16 हजार पौधे अभयारण्य क्षेत्र में लगाए गए। क्षेत्रीय वन अधिकारी रविकांत वशिष्ठ ने कहा कि पर्यावरण दिवस का उद्देश्य केवल एक दिन पौधे लगाना नहीं बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति स्थायी जागरूकता पैदा करना है।

“एक पेड़ मां के नाम — एक संकल्प प्रकृति के नाम” के संदेश के साथ यह अभियान जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल बनकर सामने आया है।

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