Thursday, October 1, 2026

मुजफ्फरनगर दंगा केस: 8 हत्याओं में 32 आरोपी बरी, कोर्ट बोला—सबूत नहीं.

मुजफ्फरनगर | वर्ष 2013 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और चर्चित मामले में मुजफ्फरनगर की स्थानीय अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के कुटबा गांव में आठ लोगों की हत्या, आगजनी और लूटपाट के आरोप में नामजद 32 आरोपियों को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट नंबर-1) मंजुला भालोटिया की अदालत ने सुनाया।

पंचायत के बाद भड़की थी हिंसा

मुजफ्फरनगर में 7 सितंबर 2013 को सांप्रदायिक तनाव उस समय भड़क गया था, जब एक पंचायत के बाद हालात बिगड़ गए। इसके अगले दिन 8 सितंबर को जिले के कई गांवों में हिंसा फैल गई। कुटबा गांव निवासी इमरान ने शाहपुर थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि 8 सितंबर की सुबह करीब 9 बजे सैकड़ों लोगों की भीड़ ने सांप्रदायिक नारे लगाते हुए मुस्लिम समुदाय के घरों पर हमला कर दिया।

एफआईआर के अनुसार, हमलावरों के पास राइफल, बंदूक, तमंचे, तलवार और अन्य धारदार हथियार थे। आरोप है कि भीड़ ने अंधाधुंध फायरिंग की, घरों में आग लगा दी, धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की और लोगों के सामान व पशुधन को लूट लिया।

8 लोगों की गई थी जान

हमले के दौरान गांव में भगदड़ मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप गए। करीब ढाई घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। इस हिंसा में वहीद, शमशाद, इरशाद, तराबू, कय्यूम, फैय्याज, मोमीन और खातून सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

111 नामजद, 36 के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट

इस मामले में पुलिस ने कुल 111 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। बाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच के बाद 36 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार आरोपियों — चतरा, दीपक, देवेंद्र और सोनू — की मौत हो गई थी। इसके बाद शेष 32 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।

कोर्ट ने कहा—अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद पाया कि आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया।

पीड़ित परिवारों को लगा झटका

करीब 12 साल बाद आए इस फैसले से पीड़ित परिवारों को गहरा झटका लगा है। लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों के लिए यह फैसला निराशाजनक माना जा रहा है।

दंगों के मामलों में लगातार आ रहे ऐसे फैसले

मुजफ्फरनगर के 2013 दंगे देश के सबसे बड़े सांप्रदायिक दंगों में गिने जाते हैं। इन दंगों से जुड़े कई मामलों में लंबे समय तक सुनवाई चलने के बाद साक्ष्यों के अभाव में आरोपी बरी हो रहे हैं। कुटबा गांव का यह मामला भी उन्हीं मामलों में से एक है, जिसने एक बार फिर जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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