लखनऊ।
मुजफ्फरनगर में कचरा जलाने से पैदा हुआ प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट और पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) को आरडीएफ के नाम पर जलाए जाने से पूरा शहर जहरीले धुएं की चपेट में है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह से लखनऊ में मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया और एक विस्तृत चेतावनी पत्र सौंपा।
धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि मुजफ्फरनगर में कागज उद्योग सहित कई औद्योगिक इकाइयों द्वारा नगरपालिका कचरा खुलेआम जलाया जा रहा है। इसके कारण जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि 12 दिसंबर 2025 को मुजफ्फरनगर का AQI करीब 400 दर्ज किया गया, जो देश में सबसे खराब स्थिति थी। यह हालात प्रशासनिक विफलता के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला हैं।
उन्होंने कहा कि कचरा जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा के साथ-साथ पानी को भी जहरीला बना रहा है। मुजफ्फरनगर से निकलने वाली काली नदी में जा रहा प्रदूषण हिंडन नदी के जरिए यमुना और फिर गंगा तक पहुंच रहा है। यह नदी तंत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दोआब क्षेत्र की जीवन रेखा है, जिस पर खेती, पशुपालन और जनस्वास्थ्य निर्भर है, लेकिन आज यही नदियां ज़हर ढो रही हैं।
धर्मेंद्र मलिक ने चेतावनी दी कि कचरा जलाने से निकलने वाले डाइऑक्सिन, फ्यूरान, पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे विषैले तत्व कैंसर, दमा और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। राख के अवैज्ञानिक निस्तारण से खेतों की मिट्टी बंजर हो रही है, फसलें प्रभावित हो रही हैं और पशुओं में बीमारी और बांझपन तेजी से बढ़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद न तो कचरा जलाने पर रोक लग रही है और न ही दोषी औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई हो रही है।
भाकियू प्रवक्ता ने मांग की कि मुजफ्फरनगर में नगरपालिका कचरे और लीगेसी वेस्ट के दहन पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, दोषी औद्योगिक इकाइयों को सील किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
धर्मेंद्र मलिक ने साफ कहा कि अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो मुजफ्फरनगर से उठता यह प्रदूषण पूरे प्रदेश और देश के लिए स्थायी आपदा बन सकता है। आज अगर इस पर रोक नहीं लगी, तो आने वाली पीढ़ियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
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