Thursday, October 1, 2026

बजट से किसान-मज़दूर मायूस — गय्यूर चौधरी, राष्ट्रीय अध्यक्ष-भारतीय किसान मजदूर सर्व समाज, का बड़ा बयान ।



मुजफ्फरनगर | 1 फरवरी 2026

केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर किसान, मज़दूर और ग्रामीण समाज में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। भारतीय किसान मजदूर सर्व समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष गय्यूर चौधरी ने बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट देश के किसान, खेतिहर मज़दूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की वास्तविक ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करने वाला है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष गय्यूर चौधरी ने कहा कि आज देश का किसान बढ़ती महंगाई, खेती की लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी, खाद-बीज-डीज़ल के आसमान छूते दाम, कर्ज़ के बोझ और घटती आमदनी से जूझ रहा है, लेकिन बजट में किसानों को कोई ठोस राहत नहीं दी गई। न तो कर्ज़माफी पर कोई स्पष्ट घोषणा की गई और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की लंबे समय से उठ रही मांग को बजट में शामिल किया गया।

उन्होंने कहा कि खेतों में पसीना बहाने वाला किसान और रोज़ मेहनत करने वाला मज़दूर सरकार की प्राथमिकताओं से बाहर दिखाई दे रहा है। सरकार विकास के दावे कर रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि गांवों की हालत लगातार बिगड़ रही है और किसान-मज़दूर आर्थिक संकट में फंसे हुए हैं।

ग्रामीण रोज़गार को लेकर भी राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बजट को निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि गांवों में बेरोज़गारी तेज़ी से बढ़ रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीण युवा रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं, लेकिन बजट में न तो रोज़गार योजनाओं को मज़बूत करने का कोई ठोस रोडमैप है और न ही न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने या मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी व्यवस्था की गई है।

आदिवासी समाज के मुद्दों पर भी गय्यूर चौधरी ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी सवालों को बजट में वह प्राथमिकता नहीं मिली, जिसकी सबसे अधिक ज़रूरत थी। इससे आदिवासी और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के बजाय शहरी और कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने वाला दिखाई देता है। यह बजट ज़मीनी सच्चाइयों से दूर, केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित है, जबकि देश का किसान और मज़दूर आज भी दो वक्त की रोटी और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है।

अंत में भारतीय किसान मजदूर सर्व समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष गय्यूर चौधरी ने सरकार से मांग की कि वह किसान, मज़दूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर बजटीय नीतियों पर दोबारा गंभीरता से विचार करे, ताकि अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग को वास्तविक राहत मिल सके।

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