मुजफ्फरनगर।
प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसका मकसद गरीब, बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों को पक्का घर देना है, वही योजना मुजफ्फरनगर शहर में कथित तौर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनितिक) ने इस योजना में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
भाकियू (अराजनितिक) के युवा महानगर अध्यक्ष वसीम खान ने आरोप लगाया कि शहर में कुछ प्रभावशाली लोग, तथाकथित किसान नेता और रसूखदार व्यक्ति अधिकारियों की मिलीभगत से प्रधानमंत्री आवास योजना का गलत लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास पहले से पक्के मकान, कई भवन, कृषि भूमि और करोड़ों की संपत्ति है, उन्होंने दबाव और मोटी रिश्वत के दम पर योजना के तहत करीब ढाई लाख रुपये का लोन पास करा लिया। इतना ही नहीं, इन मकानों को बनवाकर किराए पर भी चढ़ा दिया गया, जबकि असली हकदार आज भी छत के इंतजार में हैं।
संगठन ने अंबा विहार, इस्माइल मस्जिद के पास के एक मामले को गंभीर उदाहरण बताते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति के पास पहले से चार मकान मौजूद होने के बावजूद उसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। भाकियू का आरोप है कि यही व्यक्ति आपूर्ति विभाग को गुमराह कर अपने नाम से अंत्योदय राशन कार्ड भी बनवा चुका है और पिछले आठ वर्षों से सरकारी राशन ले रहा है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनितिक) ने मांग की है कि जिस दिन से उक्त व्यक्ति ने राशन कार्ड बनवाया है, उस दिन से अब तक लिए गए राशन की पूरी रिकवरी की जाए और उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो।
भाकियू (अराजनितिक) की प्रमुख मांगें:
– प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हुए सभी आवंटनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
– अपात्र लोगों से लोन और अनुदान की वसूली कर उनका लाभ तत्काल निरस्त किया जाए।
– दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई हो।
– गरीबों का हक मारने वालों पर एफआईआर दर्ज कर कड़ा दंड दिया जाए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। यह मामला न सिर्फ सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उन गरीबों के साथ भी अन्याय है, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं।

