Friday, October 2, 2026

आयुष मलिक प्रकरण पर टिकैत की बड़ी बात।



मुजफ्फरनगर। शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामाजिक और धार्मिक बहस को तेज कर दिया है। इस बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव या धरना-प्रदर्शन से नहीं, बल्कि संवाद और समझाइश से निकाला जाना चाहिए।

राकेश टिकैत ने कहा कि आयुष मलिक का मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारिवारिक-सामाजिक संबंधों से जुड़ा हुआ विषय है। ऐसे मामलों में समाज और परिवार को संयम से काम लेते हुए संबंधित व्यक्ति को समझाने का प्रयास करना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार और समाज से बातचीत के माध्यम से दोबारा जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि विवाह के लिए धर्म बदलना आवश्यक नहीं होता। देश में अनेक ऐसे उदाहरण मौजूद हैं जहां अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोग विवाह के बाद भी अपने-अपने धर्म और परंपराओं का पालन करते हुए साथ रह रहे हैं। टिकैत ने कहा कि यदि आयुष मलिक को विवाह करना था तो दोनों पक्ष अपने-अपने धर्म में रहते हुए भी वैवाहिक जीवन शुरू कर सकते थे।

टिकैत ने आयुष मलिक द्वारा धर्म परिवर्तन के फैसले को उचित नहीं बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस विषय पर भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर बातचीत जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार, रिश्तेदार और समाज के जिम्मेदार लोगों को युवक से संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह स्वयं भी आयुष मलिक से बातचीत करने के लिए तैयार हैं।

मामले को लेकर चल रहे विरोध और आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए टिकैत ने कहा कि किसी भी युवक या युवती को अपने धर्म और संस्कृति की अच्छाइयों के बारे में समझाना अधिक प्रभावी तरीका है। उनका कहना है कि विरोध-प्रदर्शन से अक्सर तनाव बढ़ता है, जबकि बातचीत से समाधान की संभावनाएं मजबूत होती हैं।

स्वामी यशवीर महाराज द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए टिकैत ने कहा कि समाज को सकारात्मक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकार देता है और ऐसे संवेदनशील मामलों में कानूनी और सामाजिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

आयुष मलिक धर्मांतरण प्रकरण पहले ही क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में राकेश टिकैत का यह बयान मामले को एक अलग दृष्टिकोण से देखने की सलाह देता है, जिसमें टकराव के बजाय संवाद, समझाइश और सामाजिक संतुलन पर जोर दिया गया है। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर नई बहस छिड़ने की संभावना भी बढ़ गई है।

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