खबर पश्चिमी यूपी के जनपद मुजफ्फरनगर से है।
यूजीसी (UGC) को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज होती जा रही है। जहां एक ओर भाजपा नेता और प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर अपने इस्तीफे दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूपी सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
मंगलवार को मुजफ्फरनगर नगर क्षेत्र में स्थित सनातन धर्म महाविद्यालय में भारतीय भाषा और संस्कृति पर आयोजित एक संगोष्ठी में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने भारतीय संस्कृति और परंपरा पर खुलकर विचार रखे, लेकिन जब मीडिया ने उनसे यूजीसी कानून को लेकर सवाल किया तो मंत्री जी मुस्कुराते हुए कैमरों की आईडी पर हाथ मारकर बिना कोई जवाब दिए वहां से निकल गए।
मंत्री की यह प्रतिक्रिया अब चर्चा का विषय बन गई है। सवाल यह है कि आखिर यूजीसी कानून पर मंत्री जी क्यों चुप रहे? क्या उन्हें कानून को लेकर संदेह है या फिर स्वर्ण समाज में बढ़ते असंतोष का असर उनकी चुप्पी में दिखा?
कार्यक्रम के दौरान मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति की प्राचीनता पर जोर देते हुए कहा कि भारत की संस्कृति हजारों वर्षों पुरानी है और इसे मिटाने के कई प्रयास हुए, लेकिन इसके बावजूद भारतीय संस्कृति जीवित रही और पूरी दुनिया को संस्कार देने का काम करती रही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए और भारतीय परंपरा को समझना चाहिए।
हालांकि, यूजीसी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मंत्री की चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि स्वर्ण समाज के बीच भी नाराजगी की चर्चा तेज हो रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं और यूजीसी कानून पर सरकार की स्थिति क्या स्पष्ट होती है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

