मुजफ्फरनगर से एक अहम और गंभीर मामला सामने आया है, जहां AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के कार्यकर्ताओं ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश और केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजा गया है।
ज्ञापन में AIMIM कार्यकर्ताओं ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। संविधान के प्रावधानों के अनुसार चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है, लेकिन अब तक चुनाव की तारीख और कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
ज्ञापन में कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग की स्थिति और उसकी सक्रियता को लेकर स्पष्टता नहीं है। वहीं, इस मामले से जुड़ी सुनवाई उच्च न्यायालय में लंबित है और लगातार टल रही है, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित होती जा रही है।
इसके अलावा, मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) के पुनरीक्षण और प्रकाशन की तारीखों में बार-बार बदलाव किया जा रहा है, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। AIMIM ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन में हो रही देरी चुनाव प्रक्रिया में बाधा बन रही है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव समय पर कराए जाते हैं, वहीं पंचायत चुनाव में बार-बार देरी होना लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि स्थानीय निकाय चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है और इसे अनावश्यक रूप से टाला नहीं जा सकता।
AIMIM कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए गए, तो इससे गांवों में विकास कार्य प्रभावित होंगे। पंचायतों के माध्यम से चलने वाली योजनाएं और प्रशासनिक कामकाज बाधित होंगे, जिससे ग्रामीण विकास की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी।
ज्ञापन में मांग की गई है कि जल्द से जल्द पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया जाए, राज्य निर्वाचन आयोग को सक्रिय किया जाए और संविधान के अनुसार समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित किए जाएं। साथ ही, 7 दिनों के भीतर इस पर ठोस कार्रवाई करने की अपील की गई है।
कार्यकर्ताओं ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को उच्च न्यायालय या सक्षम न्यायालय में ले जाने के लिए बाध्य होंगे।
यह मामला अब केवल चुनाव की तारीख का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती और गांवों के विकास से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है, जिस पर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर टिकी हुई है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

