बिजनौर में AIIMS (एम्स) की स्थापना को लेकर अब मामला केवल एक मांग नहीं, बल्कि एक बड़ा जनहित का मुद्दा बन चुका है। इस पूरे अभियान के केंद्र में बिजनौर के सांसद चंदन चौहान हैं, जो लगातार इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए क्षेत्र के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं।
सांसद चंदन चौहान ने AIIMS को लेकर न सिर्फ अपनी आवाज बुलंद की है, बल्कि केंद्र सरकार तक इस मुद्दे को मजबूती से पहुंचाया है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर स्पष्ट रूप से बिजनौर में AIIMS स्थापित करने की मांग रखी है। उनके अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह इलाका लंबे समय से उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है, जिससे मरीजों को गंभीर स्थिति में दिल्ली, मेरठ या अन्य बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता है।
इस बीच प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। बिजनौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा शासन को AIIMS स्थापना के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सांसद के प्रयास अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगे हैं।
सांसद चौहान ने अपने पत्र और बातचीत में यह भी स्पष्ट किया है कि बिजनौर की भौगोलिक स्थिति AIIMS के लिए बेहद अनुकूल है। उत्तराखंड की सीमा से सटे होने के कारण यहां AIIMS बनने से न सिर्फ बिजनौर बल्कि मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, संभल, हरिद्वार और रुड़की जैसे कई जिलों के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
केंद्र सरकार द्वारा बजट 2025-26 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक नए AIIMS की घोषणा के बाद सांसद की सक्रियता और तेज हो गई है। वे लगातार इस दिशा में फॉलोअप कर रहे हैं, संबंधित विभागों से संपर्क में हैं और हर स्तर पर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि यह AIIMS बिजनौर को ही मिले।
सांसद का यह प्रयास केवल AIIMS तक सीमित नहीं है, बल्कि वे लगातार क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वे समय-समय पर सरकार के समक्ष मुद्दे उठाते रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच भी यह संदेश गया है कि उनका प्रतिनिधि क्षेत्र की जरूरतों को लेकर गंभीर है और लगातार प्रयासरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजनौर में AIIMS स्थापित होता है, तो यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को नई दिशा देगा। इससे न केवल बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार सांसद चंदन चौहान की इस लगातार पैरवी और क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए बिजनौर को AIIMS की सौगात देती है या नहीं।
सांसद चंदन चौहान की सक्रियता और लगातार प्रयासों ने AIIMS की मांग को आंदोलन का रूप दे दिया है। अब यह केवल एक प्रस्ताव नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की उम्मीद और अधिकार की लड़ाई बन चुकी है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट।

