Friday, October 2, 2026

19 साल बाद नलकूप घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार।




मुजफ्फरनगर। करीब 19 साल पहले हुए बहुचर्चित 200 नलकूप (ट्यूबवेल) कनेक्शन घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) को बड़ी सफलता मिली है। ईओडब्ल्यू मेरठ की टीम ने इस मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन अवर अभियंता (JE) ब्रजेश कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा करते हुए सैकड़ों अवैध नलकूप कनेक्शन जारी किए, जिससे उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब इस घोटाले में शामिल अन्य 21 आरोपियों पर भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

यह मामला वर्ष 2006-07 का है। उस समय मुजफ्फरनगर विद्युत वितरण मंडल, जिसके अंतर्गत शामली भी शामिल था, को सामान्य योजना के तहत 941 किसानों को नलकूप कनेक्शन देने का लक्ष्य मिला था। लेकिन जांच में सामने आया कि तत्कालीन जेई ब्रजेश कुमार ने विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से निर्धारित लक्ष्य से अलग 200 अतिरिक्त नलकूप कनेक्शन अवैध रूप से जारी कर दिए। इतना ही नहीं, इन कनेक्शनों के लिए विभाग का सामान भी नियमों को ताक पर रखकर जारी कर दिया गया।

ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ कि बिना किसी सरकारी स्वीकृति और अतिरिक्त लक्ष्य के ही स्थलों का निरीक्षण दिखाया गया, फर्जी एस्टीमेट तैयार किए गए और निजी नलकूपों को बिजली कनेक्शन दे दिए गए। इस पूरे खेल से सरकार और पावर कॉरपोरेशन को लगभग 1.39 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा।

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि इस घोटाले को वैध दिखाने के लिए नेताओं के नाम पर फर्जी सिफारिशी पत्र तैयार किए गए। कुल 16 सिफारिशी पत्रों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप, तत्कालीन हथकरघा उद्योग की अध्यक्ष उमा किरण, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम आसरे वर्मा और तत्कालीन विधायक शाहनवाज राना के नाम से जारी पत्र भी शामिल थे। ईओडब्ल्यू की जांच में ये सभी पत्र पूरी तरह फर्जी और कूटरचित पाए गए।

इस महाघोटाले का खुलासा होने के बाद 4 मार्च 2008 को उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के सतर्कता विभाग के तत्कालीन निरीक्षक वीरेंद्र कुमार राय ने मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली में 33 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में मामले की जांच ईओडब्ल्यू मेरठ को सौंप दी गई।

लंबी जांच के बाद शासन ने अब 22 मुख्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इनमें कई सेवानिवृत्त और वर्तमान अधिकारी शामिल हैं। कुछ आरोपी पहले ही हाईकोर्ट से जमानत ले चुके हैं, जबकि मुख्य आरोपी ब्रजेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद अब अन्य आरोपियों पर भी कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है।

करीब दो दशक पुराने इस घोटाले में हुई गिरफ्तारी को ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि सरकारी योजनाओं में फर्जी दस्तावेजों और राजनीतिक नामों के दुरुपयोग के जरिए किए गए इस भ्रष्टाचार के मामले में अब शेष आरोपियों के खिलाफ भी जल्द कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

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