Friday, October 2, 2026

प्रेम विवाह के बाद जान का खतरा, दंपति ने SSP से मांगी सुरक्षा। 



मुज़फ़्फ़रनगर। प्रेम विवाह करने वाले एक युवा दंपति ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से गुहार लगाई है। युवती ने आरोप लगाया है कि विवाह से नाराज़ उसके परिजन लगातार धमकियां दे रहे हैं और उसे तथा उसके पति को गंभीर नुकसान पहुंचाने की बात कह रहे हैं। मामले को गंभीर बताते हुए दंपति ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

एसएसपी को दिए गए प्रार्थना पत्र में देहरादून निवासी सिमरन ने बताया कि वह बालिग है और उसके स्कूल अभिलेखों के अनुसार उसकी जन्मतिथि 29 सितंबर 2006 दर्ज है। सिमरन के अनुसार उसने 24 मार्च 2025 को मुज़फ़्फ़रनगर जनपद के ककरौली थाना क्षेत्र स्थित गांव चौरावाला निवासी शिवान्त पुत्र जलसिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया था। युवती का कहना है कि यह विवाह दोनों की स्वतंत्र इच्छा और सहमति से हुआ था तथा दोनों हिंदू धर्म को मानते हैं।

प्रार्थना पत्र में सिमरन ने आरोप लगाया कि उसके पिता पवन, माता सोनिया और भाई मोहित इस विवाह के शुरू से ही विरोध में थे। युवती का दावा है कि परिजन उसकी इच्छा के विरुद्ध उसकी शादी अधिक उम्र के व्यक्ति से कराना चाहते थे। जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ कई बार मारपीट की गई और उसे जान से मारने तक की धमकियां दी गईं।

सिमरन ने बताया कि लगातार विरोध और दबाव के चलते वह 3 जून 2026 को अपना मायका छोड़कर अपने पति के पास गांव चौरावाला आ गई थी, जहां वह वर्तमान में अपने पति शिवान्त के साथ रह रही है। आरोप है कि 7 जून को उसके माता-पिता समेत अन्य रिश्तेदार उनके घर पहुंचे और दोनों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देकर चले गए।

युवती ने अपने प्रार्थना पत्र में माता, पिता, भाई सहित अन्य रिश्तेदारों के नाम भी दर्ज कराए हैं। उसका कहना है कि उसे और उसके पति को अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। इसी आशंका को देखते हुए दोनों ने एसएसपी से सुरक्षा प्रदान करने तथा मामले में उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

दंपति का कहना है कि उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है और अब वे शांतिपूर्वक अपना वैवाहिक जीवन जीना चाहते हैं, लेकिन लगातार मिल रही धमकियों के कारण वे भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं। वहीं पुलिस प्रशासन से की गई शिकायत के बाद अब इस मामले में सुरक्षा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई को लेकर नजरें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।

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