मेरठ, 7 जून। प्रांतीयकृत नौचंदी मेला समिति के तत्वावधान में शनिवार को नौचंदी मेला परिसर स्थित पटेल मंडप में आयोजित भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन राष्ट्रभक्ति, सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक मूल्यों और समकालीन चुनौतियों पर केंद्रित काव्य प्रस्तुतियों के बीच संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को आईना दिखाने के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना, पारिवारिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी श्री प्रेमानंद पुरी जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री आचार्य राधाकृष्ण मनोडी तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम की संयोजिका एवं कवयित्री तुषा शर्मा ने सभी अतिथियों और कवियों का स्वागत करते हुए मां सरस्वती की वंदना “उज्जवल उज्जवल धवला धवला हे कल्याणी, जय जय हो माँ सरस्वती” प्रस्तुत की।
कवि सम्मेलन में सबसे पहले दिल्ली से आए हास्य एवं व्यंग्य कवि शंभू शिखर ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता और खुशियां बांटने का संदेश दिया। इसके बाद इटावा के ओज कवि कमलेश शर्मा ने अन्याय के खिलाफ मुखर होती कलम की शक्ति को अपनी कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रयागराज से आए वरिष्ठ गीतकार प्रोफेसर श्लेष गौतम ने भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को केंद्र में रखते हुए कहा कि समाज को आज भी त्याग और समर्पण की परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता है। ग्वालियर के गीतकार राजकुमार शर्मा ने प्रेम और आत्मिक परिवर्तन पर आधारित अपनी भावपूर्ण रचना से श्रोताओं का मन मोह लिया।
आगरा के हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने हिंदी भाषा की मिठास और उसकी वैश्विक पहचान पर व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रस्तुति देकर श्रोताओं को खूब हंसाया। वहीं प्रतापगढ़ की कवयित्री साक्षी तिवारी ने युगधर्मिता और बदलते सामाजिक परिवेश पर अपने विचार रखे। लखनऊ के गीतकार लोकेश त्रिपाठी ने वर्तमान सामाजिक विसंगतियों और चुनौतियों को अपनी रचनाओं के माध्यम से सामने रखा।
फिरोजाबाद के ओज कवि विष्णु उपाध्याय ने टूटते पारिवारिक संबंधों और बदलते सामाजिक मूल्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए मार्मिक कविता प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने गंभीरता से सुना। उनकी रचना में मां और बेटे के रिश्ते की पीड़ा ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम की संयोजिका तुषा शर्मा ने क्रांतिधरा मेरठ और देश के वीर शहीदों को समर्पित अपनी ओजपूर्ण रचना प्रस्तुत की। उन्होंने 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को स्मरण करते हुए राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। उनकी प्रस्तुति पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना का अनूठा संगम देखने को मिला। कवियों ने हास्य, व्यंग्य, श्रृंगार, गीत और ओज रस की रचनाओं के माध्यम से जहां मनोरंजन किया, वहीं समाज को सोचने और आत्ममंथन करने का संदेश भी दिया।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघ चालक विनोद भारतीय, पंडित सुनील भराला, जगमोहन लाल, डॉ. जितेंद्र त्यागी, मुनेश कुमार, सत्य प्रकाश अग्रवाल, प्रणव मनोडी, प्रकर्ष मनोडी, सुमनेश सुमन, विवेक शर्मा, नरेंद्र राष्ट्रवादी, राकेश गुप्ता, आलोक सिसोदिया, नासिर सैफी, आर्यन राणा, प्रिंस चौधरी, अर्क सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ हुआ। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में श्रोताओं की भारी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभावना के प्रति लोगों का जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है।संभावित छोटी और प्रभावशाली हेडलाइनें:

