“फसल फिर उग सकती है, लेकिन नस्ल बर्बाद हुई तो सुधारना मुश्किल” : चन्द्रमोहन
मुजफ्फरनगर, 07 जून।भोपा रोड स्थित पंजाबी बारात घर में रविवार को हिन्द मजदूर किसान समिति द्वारा “फसल से पहले नस्ल बचाओ” अभियान के तहत एक विशाल मजदूर-किसान महासभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आसपास के क्षेत्रों से हजारों मजदूर, किसान और युवा शामिल हुए। महासभा का मुख्य उद्देश्य समाज को नशे और जातिवाद के बढ़ते प्रभाव के प्रति जागरूक करना तथा युवा पीढ़ी को सामाजिक बुराइयों से बचाने का संदेश देना रहा।
महासभा को संबोधित करते हुए हिन्द मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष **क्रान्तिगुरु श्री चन्द्रमोहन जी** ने कहा कि फसल से भी अधिक महत्वपूर्ण नस्ल होती है। उन्होंने कहा कि खराब फसल की भरपाई दोबारा की जा सकती है, लेकिन यदि एक बार नस्ल बर्बाद हो जाए तो उसे संभालना बेहद कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि आज समाज की नस्ल को सबसे बड़ा खतरा दो चीजों से है—**नशे का जहर और जाति का कहर।** नशा व्यक्ति का नाश करता है, जबकि जातिवाद पूरे समाज का सत्यानाश कर देता है। उन्होंने कहा कि अनेक परिवार ऐसे हैं जिनकी नई पीढ़ी नशे की चपेट में आने के कारण बर्बाद हो चुकी है। कई परिवारों की जमीन तक बिक गई और उनका भविष्य संकट में पड़ गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसानों के पास जमीन ही नहीं बचेगी तो वे खेती कैसे करेंगे।
चन्द्रमोहन जी ने कहा कि नशे और जातिवाद से मजदूरों और किसानों का कोई लाभ नहीं होता, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियां कमजोर होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्ट नेता समाज को धर्म से दूर करके नशे और जाति के जाल में फंसाने का काम करते हैं। ऐसे लोग स्वयं लगातार धनवान बनते जाते हैं जबकि मजदूर और किसान वहीं के वहीं रह जाते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी व्यक्ति या नेता नशे और जातिवाद को बढ़ावा देता है, उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए क्योंकि वह समाज और नस्ल का दुश्मन है। उन्होंने कहा कि मजदूरों और किसानों को जागरूक होकर अपनी आने वाली पीढ़ियों की रक्षा करनी होगी।
अपने संबोधन के दौरान चन्द्रमोहन जी ने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुस्मृति जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य नहीं मानती। उन्होंने कहा कि जन्मजात जाति व्यवस्था में विश्वास करने वाले लोग ही मनुस्मृति का विरोध करते हैं।
महासभा में जातिवाद और नशे से मुक्ति का संदेश देते हुए हजारों युवाओं को जनेऊ धारण कराया गया। साथ ही उन्हें शपथ दिलाई गई कि वे स्वयं नशे और जातिवाद से दूर रहेंगे तथा समाज को भी इन बुराइयों से बचाने का प्रयास करेंगे। युवाओं ने देश में सभी के लिए समान और निशुल्क शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भी जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
चन्द्रमोहन जी ने कहा कि यदि समाज अपनी नस्ल और नई पीढ़ी को मजबूत बनाने पर ध्यान देगा तो स्थानीय और किसान हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान भी अधिक प्रभावी ढंग से संभव होगा। उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या, फसलों के उचित मूल्य, बिजली व्यवस्था और जनसंख्या नियंत्रण जैसे विषयों पर सफलता तभी मिलेगी जब समाज अंदर से मजबूत होगा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभाशाली युवाओं को सम्मानित भी किया गया। हाल ही में केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा मथुरा में आयोजित संभागीय खेलकूद प्रतियोगिता में योगासन प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर मुजफ्फरनगर का नाम रोशन करने वाली छात्रा **वसुंधरा मलिक** को 21 हजार रुपये का चेक और पांच किलो ड्राई फ्रूट देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा देवबंद क्षेत्र के गांव मकबरा निवासी युवा **अर्जुन** को भी 21 हजार रुपये का चेक और ड्राई फ्रूट देकर सम्मानित किया गया। अर्जुन ने नशे और जातिवाद के खिलाफ जागरूकता संदेश देने के लिए देवबंद से कार्यक्रम स्थल तक लगभग 27 किलोमीटर की सपाटे-बैठक यात्रा पूरी की और अपनी इस यात्रा को चन्द्रमोहन महाराज के चरणों में समर्पित किया।
महासभा में ओमप्रकाश, कुलदीप, विकास, राजपाल, दीपक, पंकज, अमित, नवीन, रविकांत, कुशल, तपेंद्र, प्रवीण, विनोद सहित अनेक कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में बार-बार यह संदेश दिया गया कि यदि समाज को सुरक्षित और मजबूत बनाना है तो नशे और जातिवाद जैसी बुराइयों के खिलाफ व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बचाने के लिए सामाजिक एकता और जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

