Friday, October 2, 2026

धुएं में घिरा अच्छरोंडा, ग्रामीणों का फैक्ट्रियों के खिलाफ धरना।



मेरठ। परतापुर थाना क्षेत्र के अच्छरोंडा-बहादरपुर रोड पर शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब फाइबर स्क्रैप और कबाड़ में पड़ी रुई के बड़े ढेर में आग लग गई। आग से उठे घने धुएं ने पूरे अच्छरोंडा गांव को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे ग्रामीणों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीणों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में बिल्डरों और अधिकारियों की मिलीभगत से कई फैक्ट्रियां अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले फाइबर स्क्रैप, कबाड़ और अन्य औद्योगिक कचरे को अक्सर आसपास के खाली प्लॉटों में फेंककर आग लगा दी जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे निकलने वाला जहरीला धुआं लगातार गांव के लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है।

शनिवार को हुई घटना के संबंध में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जेके फाइबर इंडस्ट्रीज के मालिक गौरव गर्ग और अभि गर्ग तथा अपराजिता स्पिनिंग मिल के मालिक नीरज मित्तल की ओर से फाइबर स्क्रैप और रुई के ढेर में आग लगवाई गई। आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास की अन्य फैक्ट्रियां भी इसकी चपेट में आने के खतरे में आ गईं। धुएं का गुबार इतना अधिक था कि पूरा अच्छरोंडा गांव धुएं की चादर में ढक गया।

ग्रामीणों के अनुसार, आग के कारण बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं सहित बड़ी संख्या में लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने आग बुझने के बाद अपराजिता स्पिनिंग मिल के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया और भारत केमिकल इंडस्ट्रीज, अपराजिता स्पिनिंग मिल तथा जेके फाइबर इंडस्ट्रीज सहित अन्य फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से कई फैक्ट्रियां पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित हो रही हैं। उनका कहना है कि कुछ इकाइयों में अवैध रूप से कीटनाशक, सल्फर और अन्य रासायनिक पदार्थों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही फैक्ट्रियों का दूषित पानी जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल प्रदूषित हो रहा है और गांव का पानी भी खराब होता जा रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि जब से क्षेत्र में इन फैक्ट्रियों की संख्या बढ़ी है, तब से गांव में गंभीर बीमारियों, विशेष रूप से कैंसर के मरीजों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिल रही है। हालांकि इस संबंध में किसी आधिकारिक स्वास्थ्य रिपोर्ट का हवाला नहीं दिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़ा जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने मांग की कि क्षेत्र में संचालित सभी फैक्ट्रियों की जांच कराई जाए और जो इकाइयां नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

कई घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि भविष्य में किसी भी फैक्ट्री की भूमिका पर्यावरण, जल स्रोतों या जनस्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने में पाई गई तो उसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

प्रदर्शन में सीसीएस यूनिवर्सिटी छात्रसंघ अध्यक्ष विजय राणा, मनीष राणा, सचिन चौधरी, मोती चौधरी, सोनू, रोहित, राजन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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