Friday, October 2, 2026

1932 से बसे 32 परिवारों पर उजड़ने का खतरा, डीएम से लगाई न्याय की गुहार।





मुजफ्फरनगर। थाना मंसूरपुर क्षेत्र के ग्राम घासीपुरा फार्म स्थित सरशादीलाल गार्डन, मजरा हुसैनपुर चौपड़ा में रहने वाले 32 परिवारों के सिर पर बेदखली का संकट मंडरा रहा है। लगभग 94 वर्षों से इस भूमि पर रह रहे परिवारों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर उन्हें बेघर होने से बचाने की मांग की है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वज वर्ष 1932 से इस बाग की देखरेख और मजदूरी का कार्य करते आ रहे हैं तथा उनकी पांच से छह पीढ़ियां इसी स्थान पर रहकर जीवन यापन कर चुकी हैं।

ग्रामीणों के अनुसार सरशादीलाल गार्डन के तत्कालीन मालिकों ने उनके पूर्वजों को कार्य के बदले रहने के लिए करीब छह बीघा भूमि पर बसाया था। वर्षों तक परिवार वहीं रहते रहे और समय के साथ उनकी पूरी पीढ़ियां इसी जमीन पर पली-बढ़ीं। ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में गार्डन का स्वामित्व बदल गया और हाल ही में इसे एक अन्य फर्म को बेच दिया गया, जिसके बाद यहां रह रहे परिवारों को हटाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि उनके पास स्वामित्व के पुराने दस्तावेज तो नहीं हैं, क्योंकि कथित रूप से पुराने प्रबंधन द्वारा वे दस्तावेज वापस ले लिए गए थे, लेकिन उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर आईडी, बिजली कनेक्शन तथा पूर्वजों की वेतन पर्चियां मौजूद हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि वे दशकों से यहां निवास कर रहे हैं।

पीड़ित महिला लतिता ने बताया कि परिवार लगातार भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। उनका आरोप है कि नए प्रबंधन की ओर से उन्हें मकानों की मरम्मत तक नहीं करने दी जाती। यदि कोई परिवार अपने घर की मरम्मत या निर्माण का प्रयास करता है तो उसे रोक दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध करने पर पुलिस के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश भी की जाती है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी के बीच लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सभी प्रभावित परिवार अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है।

पीड़ित परिवारों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि गर्ग इन्फोटेक प्रबंधन द्वारा जारी किए गए नोटिस की निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई तहसीलदार खतौली के माध्यम से कराई जाए। साथ ही प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि दशकों से बसे इन परिवारों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के उनके घरों से बेदखल न किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो 32 परिवारों के सैकड़ों सदस्य बेघर हो जाएंगे। उन्होंने प्रशासन से मानवीय आधार पर मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उनके आशियाने और भविष्य को सुरक्षित करने की गुहार लगाई है।सब हेड: “पांच पीढ़ियां इसी जमीन पर गुजार चुकीं जिंदगी, अब बेघर होने के डर में जी रहे परिवार”

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