मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुड़ एवं खांडसारी उद्योग पर मंडरा रहा बड़ा संकट आखिरकार टल गया है। प्रस्तावित गन्ना नियंत्रण आदेश-2026 को वापस लिए जाने के बाद किसानों, कोल्हू संचालकों और उद्योग से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। मुजफ्फरनगर के मोरना ब्लॉक स्थित गांव छछरौली में आयोजित बैठक में किसानों और कोल्हू संचालकों ने कहा कि यदि राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी समय रहते इस मुद्दे को मजबूती से सरकार के सामने नहीं उठाते, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पारंपरिक गुड़ उद्योग गंभीर संकट में फंस सकता था।
गांव छछरौली स्थित राठी गन्ना कोल्हू परिसर में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित गन्ना नियंत्रण आदेश-2026 में ऐसे कई प्रावधान शामिल थे, जिनका सीधा असर गुड़ एवं खांडसारी उद्योग पर पड़ता। उनका कहना था कि यदि यह मसौदा लागू हो जाता तो हजारों कोल्हू संचालकों, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होती और क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता था।
बैठक में मौजूद संचालकों ने कहा कि प्रस्तावित आदेश में शुगर मिलों के बीच न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 40 किलोमीटर करने, गुड़ और खांडसारी उद्योग पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने तथा कोल्हू संचालन को और जटिल बनाने जैसे प्रावधान शामिल थे। इन नियमों के लागू होने से छोटे उद्योगों के लिए काम करना मुश्किल हो जाता और किसानों के सामने अपनी गन्ना उपज बेचने के विकल्प भी सीमित हो सकते थे। इससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक असंतुलन की स्थिति पैदा होने की आशंका थी।
किसानों और संचालकों ने कहा कि जयंत चौधरी ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विषय नहीं माना, बल्कि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लाखों परिवारों की चिंता के रूप में सरकार के सामने रखा। उन्होंने लगातार इस मामले की पैरवी की और उद्योग से जुड़े लोगों की आवाज को प्रभावी ढंग से शासन तक पहुंचाया। वक्ताओं का कहना था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गन्ने, गुड़ और खांडसारी उद्योग पर निर्भर हैं, ऐसे में यह मसौदा लागू होने पर इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ता।
रालोद जिलाध्यक्ष संजय राठी ने कहा कि किसानों और कोल्हू संचालकों की भावनाओं को समझते हुए जयंत चौधरी ने इस विषय को गंभीरता से उठाया। लगातार प्रयासों और प्रभावी हस्तक्षेप के बाद ही सरकार ने विवादित मसौदे को वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ गुड़ उद्योग की जीत नहीं, बल्कि किसानों, मजदूरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लाखों लोगों की बड़ी जीत है।
बैठक में मौजूद कोल्हू संचालकों ने एक स्वर में कहा कि सरकार द्वारा मसौदा वापस लेने का निर्णय उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी किसानों और छोटे उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर इसी तरह उनकी आवाज उठाई जाती रहेगी। किसानों ने कहा कि उनके हितों की रक्षा के लिए जयंत चौधरी ने जिस मजबूती से भूमिका निभाई है, उसे क्षेत्र के किसान लंबे समय तक याद रखेंगे।
बैठक की अध्यक्षता चौधरी कंवरपाल सिंह ने की। इस दौरान नरेंद्र राठी, अनुज पहलवान, वेदवीर सिंह, मदनपाल एडवोकेट, वीरपाल सहरावत, विनोद कुमार, योगेंद्र सिंह, सतीश कुमार, शब्बर जैदी, जितेंद्र तोमर, हनीफ अहमद, शुभम राठी, विनीत राठी सहित बड़ी संख्या में किसान और कोल्हू संचालक मौजूद रहे।

