Friday, October 2, 2026

यूपी में एआई और डिजिटल क्रांति की तैयारी, योगी सरकार ने दिए बड़े संकेत!



लखनऊ में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था और डिजिटल विकास से जुड़े तीन बड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की योजनाओं पर गंभीर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, इंटरनेट और आधुनिक कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर परियोजना को प्रदेश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह योजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की मजबूत नींव तैयार करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डाटा सेंटर की सुविधा केवल एनसीआर तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों और शहरों तक भी इसका विस्तार किया जाए। उनका कहना था कि यदि पूरे प्रदेश में डिजिटल ढांचा मजबूत होगा, तभी उत्तर प्रदेश तकनीकी निवेश का बड़ा केंद्र बन सकेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी टेक कंपनियों के साथ लगातार संवाद बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी लाने के निर्देश दिए। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप्स को अवसर और प्रदेश को नई तकनीकी पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा टेक्नोलॉजी सबसे बड़ा आर्थिक आधार बनने जा रही है, इसलिए उत्तर प्रदेश को अभी से तैयार करना जरूरी है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने वाली महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रोजेक्ट गंगा’ की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गांवों तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क तेजी से पहुंचाया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्र भी डिजिटल दुनिया से सीधे जुड़ सकें। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी बनाया जाएगा, उन्हें बेहतर और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल उद्यमियों को शुरुआत से ही उचित इंसेंटिव दिया जाना चाहिए ताकि वे पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ काम कर सकें। उन्होंने परियोजना में पारदर्शिता बनाए रखने के भी निर्देश दिए और कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और उद्योगों को राहत देने के लिए मंडी टैक्स और मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। सरकार इस दिशा में संभावित छूट पर विचार कर रही है ताकि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को मजबूती मिल सके और किसानों को अधिक लाभ प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाने के निर्देश भी दिए। उनका कहना था कि मंडियां केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों के सम्मान और प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार अब ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है जिससे किसानों को बेहतर सुविधाएं और उद्योगों को तेज़ी से काम करने का माहौल मिल सके।

इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को प्रदेश में तकनीक, इंटरनेट और कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा देने वाली बड़ी पहल माना जा रहा है। योगी सरकार अब उत्तर प्रदेश को डिजिटल और औद्योगिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की तैयारी में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

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