Friday, October 2, 2026

106 साल पुराने ताम्रपत्रों का खजाना!



बुढाना के जैन मंदिर में संरक्षित भारत की दुर्लभ ज्ञान विरासत

मुजफ्फरनगर जनपद के बुढाना स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में लगभग 106 वर्ष पुराने दुर्लभ ताम्रपत्रों के संरक्षित और संग्रहित होने का महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की दिशा में यह खोज बेहद अहम मानी जा रही है। प्रशासन और ज्ञान भारतम मिशन की टीम ने इसे गंभीरता से लेते हुए मंदिर में संरक्षित प्राचीन अभिलेखों और पांडुलिपियों की जानकारी जुटाई।

शुक्रवार 15 मई 2026 को जिलाधिकारी श्री उमेश मिश्रा के निर्देशन एवं श्री कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के मार्गदर्शन में “ज्ञान भारतम मिशन” के अंतर्गत राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान चलाया गया। इस दौरान समिति सदस्य डॉ. राजीव कुमार ने बुढाना स्थित श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचकर वहां के पदाधिकारियों को मिशन के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।

मंदिर में संरक्षित संवत 1976 फाल्गुन बद्दी 5 का ताम्रपत्र, जो लगभग 106 वर्ष पुराना बताया जा रहा है, विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस संबंध में जैन समाज बुढाना के अध्यक्ष श्री महेश जैन एवं अन्य पदाधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। माना जा रहा है कि यह ताम्रपत्र इतिहास, धार्मिक परंपराओं और तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां समेटे हुए है।

ज्ञान भारतम मिशन के तहत देशभर में मंदिरों, मठों, जैन भंडारों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों और निजी संग्रहों में सुरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और दुर्लभ ग्रंथों का चिन्हीकरण और सूचीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा को संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

भारत विश्व की सबसे समृद्ध पांडुलिपि विरासतों वाले देशों में माना जाता है। अनुमान है कि देश में लगभग 1 करोड़ प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, गणित, ज्योतिष, वास्तु, संस्कृति, भारतीय कला और वैदिक परंपराओं से जुड़ा विशाल ज्ञान सुरक्षित है। ये धरोहरें अलग-अलग भाषाओं और लिपियों में लिखी गई हैं और देश के विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों में संग्रहित हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये पांडुलिपियां केवल पुराने ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान की जीवित पहचान हैं। लेकिन लंबे समय से संरक्षण के अभाव में कई पांडुलिपियां नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। कई दुर्लभ दस्तावेज अब तक प्रकाशित या डिजिटाइज भी नहीं किए जा सके हैं।

इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में “ज्ञान भारतम मिशन” की घोषणा की है। यह मिशन पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा वर्ष 2003 में शुरू किए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन की अवधारणा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है। मिशन का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान को संरक्षित करना, डिजिटलीकरण करना, आधुनिक तकनीक से जोड़ना और वैश्विक स्तर पर भारत की बौद्धिक विरासत को स्थापित करना है।

बुढाना के श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मिले और संरक्षित ताम्रपत्र अब स्थानीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी शोध और संरक्षण का विषय बनते जा रहे हैं। प्रशासन और मिशन की टीम इसे भारत की ऐतिहासिक धरोहर बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।

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