Friday, October 2, 2026

स्वास्थ्य सेवाओं में मुजफ्फरनगर बना मिसाल, बदलती तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा।



खबर पश्चिम उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।

मुजफ्फरनगर, 15 मई। कभी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चुनौतियों से जूझने वाला जनपद आज तेज़ी से प्रदेश में एक नई पहचान बना रहा है। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के नेतृत्व और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया की सक्रिय कार्यशैली ने जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। पिछले कुछ वर्षों में हुए बड़े बदलाव अब जमीन पर साफ दिखाई दे रहे हैं, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिल रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में मुजफ्फरनगर का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। शून्य से एक वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण अभियान में जनपद ने 100.41 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज कर लक्ष्य से भी आगे निकलने का काम किया है। वहीं जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 90.56 प्रतिशत तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा बढ़ा है।

परिवार नियोजन कार्यक्रम में भी जनपद ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। महिला नसबंदी के 2186 और पुरुष नसबंदी के 67 मामले दर्ज किए गए। खास बात यह रही कि सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने स्वयं 26 पुरुष नसबंदी सफलतापूर्वक कराकर एक अलग उदाहरण पेश किया, जिसकी स्वास्थ्य विभाग में खूब चर्चा हो रही है।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत जनपद में 7 लाख 26 हजार 989 गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं टीबी उन्मूलन अभियान में निश्चित पोषण योजना के तहत 103 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करना भी विभाग की मजबूत कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

गुणवत्ता सुधार के मोर्चे पर भी बड़ी उपलब्धियां सामने आई हैं। जिला अस्पताल का नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) असेसमेंट सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों का चरणबद्ध मूल्यांकन कर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने का कार्य जारी है।

जनपद में कुल 217 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में से 57 का मूल्यांकन पूरा किया जा चुका है, जबकि कई अन्य केंद्रों का असेसमेंट प्रस्तावित है। इसके साथ ही “बालिका उपवन” जैसी अनूठी पहल ने स्वास्थ्य के साथ सामाजिक जागरूकता को भी नई दिशा दी है। बेटी के जन्म पर पौधारोपण कर “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” अभियान को धरातल पर उतारा जा रहा है।

स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू के रूप में विकसित किया गया है, जहां गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। खतौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सीटी स्कैन और डिजिटल एक्स-रे जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू की गई हैं। पहले जहां पूरे जनपद में केवल 4 एक्स-रे मशीनें थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 12 कर दी गई है।

वर्ष 2025 में भारत सरकार की कॉमन रिव्यू मिशन टीम ने जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किया और यहां की व्यवस्थाओं की खुलकर सराहना की। यह उपलब्धि न केवल मुजफ्फरनगर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।

इसके अलावा Indian Medical Association के चिकित्सकों द्वारा जिला अस्पताल में निःशुल्क ओपीडी सेवाएं दी जा रही हैं। वहीं सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया स्वयं जिला अस्पताल और सिसौली सीएचसी में मरीजों को परामर्श देकर सेवा भावना का उदाहरण पेश कर रहे हैं।

लगातार हो रहे इन प्रयासों का नतीजा अब साफ दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बदलता मुजफ्फरनगर अब उत्तर प्रदेश में एक मॉडल जिले के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

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