देश में लगातार बढ़ती महंगाई और आसमान छूती सोने की कीमतों ने आम लोगों की जेब पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि बड़ी संख्या में लोग अब सोना खरीदने से दूरी बनाने लगे हैं। बाजार में ग्राहकों की भीड़ कम दिखाई दे रही है और ज्वेलर्स भी बिक्री घटने की बात कह रहे हैं।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था और विकास को लेकर लगातार बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ महंगाई ने आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खाने-पीने की चीजों से लेकर पेट्रोल, गैस और रोजमर्रा के सामान तक की कीमतें पहले ही लोगों की कमर तोड़ रही थीं, अब सोने की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को बड़ा झटका दिया है।
सर्राफा बाजार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में सोने के दाम इतनी तेजी से बढ़े हैं कि शादी-ब्याह और निवेश के लिए भी लोग खरीदारी टालने लगे हैं। पहले जहां लोग त्योहारों और शादियों में सोना खरीदना शुभ मानते थे, वहीं अब लोग छोटे गहनों या हल्के वजन के विकल्प चुनने को मजबूर हो रहे हैं। कई परिवार तो केवल पुराने गहनों की अदला-बदली कर काम चला रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती, वैश्विक तनाव और घरेलू महंगाई जैसे कारणों से सोने की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे आम जनता की भावनाओं और बजट पर दिखाई देता है।
हालात इतने गंभीर होते जा रहे हैं कि कई शहरों में ज्वेलरी कारोबारियों ने बिक्री में भारी गिरावट की बात कही है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक दुकान तक तो पहुंच रहे हैं, लेकिन कीमत सुनकर बिना खरीदारी लौट रहे हैं। खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि यदि महंगाई और सोने की कीमतों पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ तो आने वाले समय में आम लोगों की बचत और खरीद क्षमता पर और बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल देशभर में बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है और आम जनता राहत की उम्मीद लगाए बैठी है।

