Thursday, October 1, 2026

शिक्षिका सस्पेंड, स्कूल बंद—छात्रों का उग्र विरोध।



उत्तर प्रदेश के कासगंज जनपद के भिटोना स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में एक शिक्षिका के निलंबन को लेकर हालात तनावपूर्ण हो गए। जैसे ही छात्रों को शिक्षिका शालिनी मिश्रा के सस्पेंशन की जानकारी मिली, उनका गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और अपने बस्ते गेट पर लटकाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बच्चों का साफ कहना है कि जब तक उनकी प्रिय शिक्षिका को वापस नहीं बुलाया जाएगा, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा। विरोध इतना तेज था कि स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई, जबकि वहां अन्य शिक्षक भी मौजूद हैं।

छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि उनकी शिक्षिका के खिलाफ साजिश के तहत कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि शिक्षिका शालिनी मिश्रा सभी बच्चों को बिना भेदभाव के पढ़ाती थीं और स्कूल में अनुशासन व साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देती थीं। छात्रों के मुताबिक, हाल ही में उन्होंने स्कूल परिसर की सफाई की थी, जिसका वीडियो किसी ने बनाकर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को भेज दिया। इसके बाद ही यह कार्रवाई हुई।

हालांकि, इस पूरे मामले में कासगंज के बेसिक शिक्षा अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। फोन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षिका को बच्चों से सफाई करवाने के कारण निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि उनके द्वारा पदीय दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन न करने के चलते करीब एक सप्ताह पहले ही निलंबन की कार्रवाई की गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले शिक्षिका को नोटिस दिया गया था और पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की गई है।

स्थिति को संभालने के लिए शिक्षा विभाग ने दो खंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूल भेजकर पढ़ाई शुरू करवाने की कोशिश की, लेकिन छात्रों के विरोध के आगे यह प्रयास भी विफल रहा। नतीजतन, विद्यालय में शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है।

वहीं, छात्रों की भावनाएं इस विरोध में साफ झलक रही हैं। एक छात्रा ने कहा कि वर्षों से पढ़ा रहीं उनकी शिक्षिका के साथ अन्याय हुआ है और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, वे पीछे नहीं हटेंगे। दूसरी छात्रा ने कहा कि जैसे वे अपने घर की सफाई करते हैं, वैसे ही स्कूल की सफाई करना भी उनका कर्तव्य है—इसके लिए किसी को सजा देना गलत है।

छात्रों का कहना है—“स्कूल हमारा मंदिर है, उसकी साफ-सफाई करना हमारा कर्तव्य है।”

अब इस पूरे मामले में सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या छात्रों की मांग पर शिक्षिका की वापसी होगी या फिर विभागीय कार्रवाई अपने तय नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी। फिलहाल, कासगंज का यह स्कूल छात्रों के विरोध के कारण बंद है और माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

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