नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इलाकों में हाल ही में हुए श्रमिक विरोध और उसके दौरान हुई हिंसा ने प्रशासन को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए योगी आदित्यनाथ ने तुरंत एक हाई पावर कमेटी का गठन किया, जिसका मकसद श्रमिकों की समस्याओं को समझना और उनका स्थायी समाधान निकालना है। कमेटी की सिफारिशों को अब तेजी से लागू किया जा रहा है।
इसी के तहत मेधा रूपम (जिलाधिकारी) ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने सूरजपुर इंडस्ट्रियल एरिया समेत नोएडा और ग्रेटर नोएडा की एक दर्जन से ज्यादा कंपनियों का लगातार दौरा किया। इस दौरान उन्होंने फैक्ट्री मालिकों, प्रबंधन और वहां काम कर रहे श्रमिकों के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत की।
डीएम ने मजदूरों से सीधे सवाल पूछकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की कोशिश की। कई श्रमिकों ने वेतन, काम के घंटे, सुविधाओं और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। इस पर डीएम ने मौके पर ही अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन को निर्देश दिए कि हर समस्या का त्वरित समाधान किया जाए और किसी भी शिकायत को नजरअंदाज न किया जाए।
वेतन को लेकर भी प्रशासन बेहद गंभीर नजर आया। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद जो सैलरी बढ़ाई गई है, उसका लाभ हर श्रमिक तक पहुंचे—इसको सुनिश्चित करने के लिए डीएम ने विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियां अपने मुख्य गेट पर हाई पावर कमेटी के फैसलों और नई सैलरी से जुड़ी जानकारी को स्पष्ट रूप से चस्पा करें, ताकि कोई भी श्रमिक अपने अधिकारों से अनजान न रहे। प्रशासन ने इसकी मॉनिटरिंग भी शुरू कर दी है और कई जगहों पर नोटिस लगाए जा चुके हैं।
बैठक के दौरान डीएम ने फैक्ट्री मालिकों को सख्त चेतावनी दी कि श्रमिकों का किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियमों का पालन हर हाल में करना होगा। अगर कोई कंपनी या प्रबंधन इन नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आउटसोर्सिंग कंपनियों को भी डीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि अगर उनके माध्यम से काम करने वाले श्रमिकों के साथ अन्याय या शोषण की शिकायत मिलती है, तो सीधे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब इस पूरे सिस्टम पर भी नजर बनाए हुए है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डीएम ने श्रमिकों से भी संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा, तोड़फोड़ या विरोध प्रदर्शन के जरिए नहीं, बल्कि बातचीत और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाए। प्रशासन हर स्तर पर उनकी मदद के लिए मौजूद है।
सूरजपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में फिलहाल प्रशासन की सक्रियता साफ दिखाई दे रही है। लगातार दौरे, बैठकें और निगरानी के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि भविष्य में इस तरह का कोई विवाद दोबारा न हो।
प्रशासन का साफ संदेश है—औद्योगिक शांति हर हाल में बनाए रखनी होगी, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।

