मुजफ्फरनगर:
निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ अब आवाज तेज हो गई है। शिवसेना ने मुजफ्फरनगर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा और सख्त कार्रवाई की मांग की।
यह अभियान शिवसेना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बैनर तले चलाया गया, जिसमें प्रदेश प्रमुख ललित मोहन शर्मा के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। संगठन के पदाधिकारियों ने जिला अधिकारी के जरिए शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन देकर निजी स्कूलों की मनमानी पर तुरंत रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि मुजफ्फरनगर में सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं होने के कारण अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजते हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर स्कूल प्रबंधन भारी फीस वसूल रहे हैं। किताबों और ड्रेस के नाम पर भी अभिभावकों से कई गुना ज्यादा पैसा लिया जा रहा है।
शिवसेना के अनुसार, जहां पहले किताबों पर 1000 से 1500 रुपये तक कमीशन लिया जाता था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 5000 रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह 200 रुपये की ड्रेस को 1500 से 2000 रुपये में बेचा जा रहा है। छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए भी किताबों का खर्च 4000 से 5000 रुपये तक पहुंच चुका है, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि पब्लिकेशन कंपनियों से स्कूलों को पहले ही लगभग 60 प्रतिशत तक कमीशन मिल जाता है, इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। इससे शिक्षा व्यवस्था में तेजी से व्यवसायीकरण बढ़ रहा है और आम परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल होता जा रहा है।
शिवसेना ने प्रशासन से मांग की है कि हर साल अगली कक्षा में प्रवेश के नाम पर दोबारा एडमिशन फीस लेना तुरंत बंद कराया जाए। साथ ही, अभिभावकों को किसी एक दुकान से किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता तक रद्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा, प्रत्येक कक्षा के लिए फीस तय करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा ने साफ कहा कि अभिभावकों का शोषण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा।
इस दौरान कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने अभिभावकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। मुजफ्फरनगर में यह मुद्दा अब तेजी से चर्चा में आ गया है और लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस पर जल्द ही ठोस कदम उठाएगा।

