उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट नंबर 3 ने सोमवार को अधिवक्ता समीर सैफी के अपहरण और हत्या के मामले में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई, जबकि एक अन्य आरोपी को 7 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई है। सभी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
यह मामला 16 अक्टूबर 2019 का है, जब समीर सैफी के पिता मोहम्मद अजहर ने नगर कोतवाली में अपने बेटे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। समीर सैफी पेशे से वकील थे और एक दिन पहले ही उनके नए चैंबर का उद्घाटन हुआ था। उसी शाम वह अचानक लापता हो गए, जिससे परिवार और वकीलों में हड़कंप मच गया।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की और नामजद आरोपियों—सिलांग अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान, शालू उर्फ अरबाज और दिनेश—को गिरफ्तार कर पूछताछ की। जांच में जो सच्चाई सामने आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी।
दरअसल, आरोपी समीर सैफी के करीबी दोस्त थे। उनके बीच पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद के चलते तीनों मुख्य आरोपियों ने योजना बनाकर पहले समीर का अपहरण किया और फिर रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को सीकरी गांव के एक खेत में गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। इस काम में दिनेश ने उनकी मदद की थी।
करीब तीन दिन बाद, 20 अक्टूबर 2019 को पुलिस ने शव बरामद किया और हत्या की पुष्टि हुई। इसके बाद चारों आरोपियों को जेल भेज दिया गया और मामला सेशन कोर्ट में चला।
लंबी सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इसे बेहद जघन्य अपराध माना। अदालत ने कहा कि पैसों के लिए दोस्त द्वारा दोस्त की हत्या करना समाज के लिए गंभीर खतरा है। इसी आधार पर मुख्य आरोपी सिलांग अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि दिनेश को सबूत मिटाने के अपराध में 7 साल की सजा दी गई।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि यह फैसला न केवल न्याय दिलाने वाला है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
करीब 7 साल तक चले इस मुकदमे के बाद आया यह फैसला मुजफ्फरनगर के न्यायिक इतिहास में एक अहम और यादगार निर्णय माना जा रहा है।

