कानपुर में किडनी रैकेट से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले का खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में डॉ. अफजल और परवेज शैफी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें होटल के कमरे में बेड पर नोटों की गड्डियां साफ दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और पूरे नेटवर्क की गहराई को उजागर करता है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी परवेज शैफी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वह पहले गाजियाबाद में लूट और डकैती के मामलों में जेल जा चुका है। इसके बावजूद वह इस संगठित किडनी रैकेट में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
सूत्रों के अनुसार, परवेज शैफी का काम दिल्ली और गाजियाबाद से लोगों और टीम को कानपुर तक लाने के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करना था। इससे यह साफ होता है कि यह रैकेट सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई शहरों में फैला हुआ एक संगठित नेटवर्क था।
बताया जा रहा है कि रविवार को परवेज शैफी आरोपियों को लेकर आहूजा हॉस्पिटल पहुंचा था, जहां कथित तौर पर इस अवैध गतिविधि को अंजाम देने की तैयारी थी। अस्पताल का नाम सामने आने से स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वीडियो में जिस तरह से पैसों की गड्डियां दिखाई दे रही हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह रैकेट करोड़ों के लेन-देन से जुड़ा हो सकता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को लालच या मजबूरी में फंसाकर उनके अंगों की खरीद-फरोख्त किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध है, जिसमें सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

