Thursday, October 1, 2026

बिजनौर के सांसद चंदन चौहान सिंह की बड़ी मांग—डॉक्टरों की पर्ची पर अब दवा का पूरा फॉर्मूला लिखना जरूरी!

आज लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया। श्री चंदन चौहान सिंह (बिजनौर) ने सदन के पटल पर यह गंभीर सवाल रखा कि आम मरीजों को सस्ती और पारदर्शी दवा उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टरों की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) में सुधार जरूरी है।
उन्होंने अपने प्रश्न के माध्यम से कहा कि वर्तमान में अधिकांश प्राइवेट डॉक्टर अपनी पर्ची पर केवल दवाइयों के ब्रांड नाम लिखते हैं। इससे मरीज को वही महंगी ब्रांडेड दवा खरीदनी पड़ती है, जबकि उसी दवा के सस्ते जेनेरिक विकल्प बाजार में उपलब्ध होते हैं।
इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि डॉक्टरों को पर्ची पर केवल ब्रांड नहीं, बल्कि दवा की कंपोजिशन (संरचना) और साल्ट (घटक) भी अनिवार्य रूप से लिखना चाहिए। इससे मरीज उसी दवा को किसी भी मेडिकल स्टोर या प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत चलने वाले जन औषधि केंद्र से कम कीमत पर खरीद सकेगा।
इसके साथ ही उन्होंने एक और अहम सुझाव दिया कि जेनेरिक दवाइयों पर स्टार रेटिंग या प्रिंटिंग सिस्टम लागू किया जाए। इससे दवा की गुणवत्ता और प्रभावशीलता के बारे में मरीजों को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी और उनका भरोसा भी बढ़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्राइवेट डॉक्टरों को दवाइयां लिखने के लिए एक निश्चित श्रेणी (स्टैंडर्ड सिस्टम) में लाया जाना चाहिए, ताकि वे जरूरत के अनुसार ही दवाएं लिखें और अनावश्यक महंगी दवाओं से बचा जा सके।
इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में जवाब देते हुए सरकार के प्रयासों की जानकारी दी और आश्वासन दिया कि आम जनता को किफायती, पारदर्शी और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
यह मुद्दा सीधे देश के करोड़ों मरीजों से जुड़ा हुआ है। यदि इन सुझावों को लागू किया जाता है, तो न केवल दवाइयों की कीमतों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को भी सस्ती और प्रभावी इलाज की सुविधा मिल सकेगी

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