मुजफ्फरनगर, 9 मार्च।
जनपद में आगामी 14 मार्च 2026 (द्वितीय शनिवार) को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफ्फरनगर के कुशल निर्देशन में सोमवार को जिला कारागार में निरीक्षण और विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया, जिसमें बंदियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस दौरान डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी, सिविल जज (सी.डी.) एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मुजफ्फरनगर ने जिला कारागार मुजफ्फरनगर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कारागार की पाकशाला, अस्पताल, पुरुष बैरक, महिला बैरक तथा बाल बैरक का जायजा लिया और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इसके साथ ही दोषसिद्ध बंदियों के हित में एक विधिक जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया।
शिविर के दौरान डॉ. चौधरी ने उपस्थित बंदियों को उनके संवैधानिक और विधिक अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने बंदियों की समस्याएं भी सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया कि यदि किसी दोषसिद्ध बंदी को माननीय उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने में कोई कानूनी समस्या आती है तो वह जिला कारागार अधीक्षक के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अवगत करा सकते हैं या आवेदन दे सकते हैं, जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कारागार अधीक्षक को निर्देश दिए कि जिन बंदियों के मामलों का निस्तारण ई-जेल लोक अदालत अथवा जेल लोक अदालत के माध्यम से संभव है, उनकी सूची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजी जाए, ताकि ऐसे मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जा सके। इसके अतिरिक्त जिन बंदियों की जमानत याचिका अधीनस्थ न्यायालय द्वारा स्वीकृत हो चुकी है, उन्हें विधिक सहायता भी प्रदान की गई।
डॉ. चौधरी ने बताया कि आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 14 मार्च 2026 को किया जाएगा। यह लोक अदालत दीवानी न्यायालय परिसर मुजफ्फरनगर, बाह्य न्यायालय बुढाना, ग्राम न्यायालय जानसठ, ग्राम न्यायालय खतौली तथा कलक्ट्रेट मुजफ्फरनगर में आयोजित होगी।
इस लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर किया जाएगा। इनमें आपराधिक मामलों, धारा 138 एन.आई. एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, टेलीफोन, बिजली एवं पानी के बिल से संबंधित विवाद, वैवाहिक वाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व वाद तथा अन्य सिविल वाद शामिल हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आम जनता से अपील की है कि जिनके मामले लोक अदालत में निस्तारण योग्य हैं, वे इस अवसर का लाभ उठाएं। लोक अदालत के माध्यम से मामलों का त्वरित, सरल और कम खर्च में समाधान संभव होता है, जिससे लंबे समय से लंबित विवादों का निपटारा भी शीघ्र हो सकता है।

