संसद के बजट सत्र का अंतराल जिस समय हुआ था, उस समय देश और दुनिया के हालात अलग थे। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने युद्ध जैसे हालातों ने स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। ऐसे संकट के समय में देश की संसद और सरकार के सामने कई अहम मुद्दे खड़े हो गए हैं, जिन पर तुरंत चर्चा और ठोस निर्णय लेना जरूरी माना जा रहा है।
सबसे पहला और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मौजूदा युद्ध के संदर्भ में भारत की स्पष्ट नीति और राय क्या है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका क्या होगी और देश किस पक्ष में या किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा, यह अब राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए संतुलित और मजबूत विदेश नीति अपनानी होगी।
इसी के साथ यह मुद्दा भी गंभीर रूप से सामने आया है कि क्या भारत की विदेश नीति पर बाहरी दबाव बढ़ रहा है। खासतौर पर तेल जैसी आवश्यक आपूर्ति के मामलों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत अपने आत्मनिर्णय के आधार पर फैसले ले पा रहा है या फिर अमेरिका जैसे बड़े देशों के दबाव का असर देखने को मिल रहा है। यह मुद्दा सीधे तौर पर देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
युद्ध की वजह से सबसे बड़ी चिंता उन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है, जो प्रभावित देशों में काम कर रहे हैं या पर्यटन के उद्देश्य से वहाँ गए हुए हैं। ऐसे हालात में सरकार के सामने यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वह वहां फँसे सभी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए विशेष अभियान चलाए।
इसके अलावा एक और गंभीर मुद्दा सामने आया है। प्रधानमंत्री के विदेश दौरे के दौरान उनके साथ गए कुछ पत्रकार और मीडियाकर्मी भी युद्ध शुरू होने की वजह से वापस भारत नहीं लौट पाए हैं। ऐसे में इन पत्रकारों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित देश वापस लाने का सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। मीडिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
युद्ध का असर केवल कूटनीति और सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय संकट की वजह से तेल, खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति नियमित और सुनिश्चित रखी जाए, साथ ही उनके बढ़ते दामों पर भी नियंत्रण रखा जाए ताकि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
ऐसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय हालातों में उम्मीद की जा रही है कि संसद में इन सभी मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी और देशहित को ध्यान में रखते हुए ठोस रणनीति बनाई जाएगी। क्योंकि यह केवल विदेश नीति का सवाल नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा, संप्रभुता और करोड़ों भारतीयों के हितों से जुड़ा हुआ मामला है।

