Thursday, October 1, 2026

कानपुर के लाटूश रोड की अनोखी होलिका: पीएम मोदी को ‘पुष्पा’ थीम में दर्शाया गया।


कानपुर में होली का त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन शहर के लाटूश रोड क्षेत्र की होलिका दहन की परंपरा विशेष पहचान रखती है। वर्ष 1962 से चली आ रही इस परंपरा के तहत यहां हर वर्ष अलग-अलग सामाजिक, राजनीतिक या समसामयिक विषयों पर आधारित होलिका का निर्माण किया जाता है। यही वजह है कि इस अनोखी थीम आधारित होलिका को देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं।

इस वर्ष नुक्कड़ सोसायटी द्वारा टैरिफ (शुल्क) के मुद्दे को केंद्र में रखकर होलिका का प्रांगण सजाया गया है। आयोजन स्थल पर भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को फिल्म Pushpa: The Rise के लोकप्रिय संवाद “झुकेगा नहीं” की थीम पर प्रस्तुत किया गया है। पीएम मोदी का पुतला भगवा वस्त्र पहने, दाहिने हाथ को दाढ़ी पर लगाए हुए इस भाव में दर्शाया गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में झुकने वाले नहीं हैं।

इसके साथ ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का भी पुतला बनाया गया है। आयोजकों के अनुसार यह प्रस्तुति अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों और टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर भारत की प्रतिक्रिया को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाती है।

नुक्कड़ सोसायटी के आयोजक उपेश कश्यप ने बताया कि यह थीम हाल के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रमों से प्रेरित है। उनका कहना है कि “ट्रंप द्वारा किए गए टैरिफ वार का हमारे प्रधानमंत्री ने मजबूती से सामना किया और देशहित में ठोस निर्णय लिए। देश की सेवा के लिए प्रधानमंत्री कभी झुकते नहीं हैं, इसलिए उन्हें ‘पुष्पा’ का टाइटल दिया गया है।”

लाटूश रोड की यह परंपरा समय-समय पर सामयिक विषयों को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करती रही है। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि समसामयिक घटनाओं को सांकेतिक और कलात्मक ढंग से सामने लाना है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह आयोजन होली के पारंपरिक उत्साह के साथ सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता का भी माध्यम बन चुका है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में लोग इस विशेष होलिका दहन को देखने पहुंच रहे हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के आवश्यक इंतजाम किए गए हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

लाटूश रोड की यह थीम आधारित होलिका न केवल कानपुर की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है, बल्कि यह दर्शाती है कि किस प्रकार त्योहारों के माध्यम से समसामयिक मुद्दों को रचनात्मक अभिव्यक्ति दी जा सकती है।

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