Thursday, October 1, 2026

झुग्गी हटाने की कार्रवाई पर गरमाई सियासत, गरीबों की आवाज बने विधायक पंकज मलिक।



मुजफ्फरनगर। शामली रोड स्थित काली नदी किनारे रह रहे गरीब झुग्गी-झोपड़ी परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था हटाने की तैयारी ने अब बड़ा राजनीतिक और मानवीय मुद्दा बना दिया है। चरथावल से समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक अचानक ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर न सिर्फ प्रभावित परिवारों की आपबीती सुनी, बल्कि मौके से ही अधिकारियों को फोन कर सख्त लहजे में कार्रवाई रोकने की बात कहते नजर आए। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

बताया जा रहा है कि जैसे ही झुग्गी-झोपड़ी हटाने की सूचना इलाके में फैली, वहां रहने वाले गरीब परिवारों में दहशत का माहौल बन गया। कई महिलाओं और बुजुर्गों ने विधायक के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं है और अचानक हटाए जाने से उनका परिवार सड़क पर आ जाएगा। लोगों ने अपनी रोजमर्रा की मुश्किलें, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार से जुड़े संकट भी विधायक के सामने रखे।

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, झुग्गीवासियों की हालत देखकर विधायक पंकज मलिक कुछ समय के लिए भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि गरीब का घर उजाड़ना किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता और प्रशासन को पहले पुनर्वास की ठोस योजना बनानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हर परिवार के लिए वैकल्पिक आवास और सम्मानजनक व्यवस्था नहीं होगी, तब तक किसी को हटाना अन्याय होगा।

ग्राउंड जीरो से ही विधायक ने संबंधित अधिकारियों को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया। वायरल वीडियो में वे फोन पर सख्त शब्दों में कहते दिख रहे हैं कि बिना पुनर्वास गरीब परिवारों को परेशान न किया जाए और कार्रवाई तत्काल रोकी जाए। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है और अलग-अलग दलों के नेता इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

विधायक ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि गरीबों के साथ संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना है।

वहीं, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहली बार कोई जनप्रतिनिधि उनकी समस्या सुनने के लिए सीधे मौके पर आया है, जिससे उन्हें उम्मीद जगी है कि शायद उनका आशियाना बच सके।

फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पूरे मामले ने शहर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन गरीब परिवारों के पुनर्वास को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है और यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है।

जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

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