30 साल का धरना… अब भी इंसाफ अधूरा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक ऐसा आंदोलन चल रहा है, जिसने समय के साथ एक मिसाल का रूप ले लिया है। मास्टर विजय सिंह पिछले करीब 30 साल से धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि गांव की ग्रामसभा और सार्वजनिक जमीन पर भूमाफियाओं ने अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन लंबी जांच और कई सरकारों के बदलने के बावजूद आज तक पूरी कार्रवाई नहीं हो पाई।
शहर के व्यस्त शिवमूर्ति चौराहे के पास एक दुकान के बाहर बिछी दरी, टंगा हुआ बैनर और दो हिंदी अखबार — यही मास्टर विजय सिंह के आंदोलन की पहचान बन चुके हैं। रोज सुबह अपने गांव से आकर वे उसी जगह बैठते हैं, जैसे कोई कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर पहुंचता है। फर्क सिर्फ इतना है कि उनकी ड्यूटी इंसाफ की लड़ाई है, जो जवानी से शुरू होकर अब बुढ़ापे तक पहुंच चुकी है।
—
जमीन बचाने की लड़ाई से शुरू हुआ संघर्ष
मास्टर विजय सिंह ने 26 फरवरी 1996 को अपने गांव चौसाना की करोड़ों रुपये कीमत वाली जमीन को कथित अवैध कब्जे से मुक्त कराने की मांग को लेकर धरना शुरू किया था। उनका कहना है कि उस समय के प्रभावशाली लोगों और भूमाफियाओं ने हजारों बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया था। बाद में हुई जांचों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई गांवों में ग्रामसभा, तालाब और वन क्षेत्र की जमीन पर कब्जे की बातें सामने आईं, लेकिन जमीन पूरी तरह खाली नहीं कराई जा सकी।
समय के साथ प्रशासनिक सीमाएं बदलीं और उनका गांव चौसाना अब शामली जिले में चला गया, मगर उनका धरना आज भी मुजफ्फरनगर में जारी है।
—
सरकारों को खुली चुनौती
विजय सिंह साफ कहते हैं कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, धरना खत्म नहीं होगा। उनका मानना है कि अगर शिकायत गलत है तो उन्हें जेल भेज दिया जाए, लेकिन अगर जांच में कब्जा साबित हो चुका है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। वे कहते हैं कि सरकारों ने जांच कराई, रिपोर्ट भी आई, फिर भी जमीन मुक्त नहीं कराई गई।
उनका दावा है कि करीब 4000 बीघा जमीन पर कब्जा हुआ और यह जनहित से जुड़ा मामला है। वे खुद को गांधीवादी बताते हैं और कहते हैं कि हिंसा में उनका विश्वास नहीं है, इसलिए उन्होंने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाई।
—
जिंदगी की कीमत पर आंदोलन
तीन दशक लंबे इस धरने ने उनकी निजी जिंदगी पर भी असर डाला है। विजय सिंह बताते हैं कि परिवार के लोग उन्हें जिद्दी या सनकी कहते हैं, लेकिन वे इसे अपने कर्तव्य की तरह निभा रहे हैं। उनके पास संपत्ति के नाम पर कुछ खास नहीं बचा, सिर्फ धरने की दरी और बैनर ही उनकी पहचान बन गए हैं।
सफेद बालों और झुकी हुई उम्र के बावजूद उनकी आंखों में उम्मीद बाकी है। वे कहते हैं कि उनके पास भले कुछ न हो, लेकिन उनके सवाल बहुत कीमती हैं — सवाल यह है कि क्या व्यवस्था इन सवालों की कीमत समझेगी।
—
30 साल बाद भी इंतजार
मुजफ्फरनगर को अक्सर किसान आंदोलनों के लिए जाना जाता है, लेकिन मास्टर विजय सिंह का यह अकेला धरना अलग पहचान रखता है। जवानी में शुरू हुई यह लड़ाई अब बुढ़ापे तक पहुंच गई है, लेकिन उनका विश्वास अभी टूटा नहीं है।
यह धरना सिर्फ जमीन के विवाद की कहानी नहीं, बल्कि उस आम आदमी की आवाज है जो व्यवस्था से जवाब मांग रहा है — और 30 साल बाद भी इंसाफ का इंतजार कर रहा है।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

