Thursday, October 1, 2026

सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित करने की मांग, हजारों देशभक्तों का उमड़ा जनसैलाब।


खबर उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर से है।

मुजफ्फरनगर।
देश की आज़ादी के इतिहास में 1857 की क्रांति भारतीय जनमानस के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान की अमिट गाथा है। इसी क्रांति के दौरान उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर के पुरकाजी कस्बे में स्थित ऐतिहासिक सूली वाला बाग अंग्रेजों के अत्याचार और देशभक्तों के बलिदान का साक्षी रहा।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी 2026 को सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित करने की मांग को लेकर पुरकाजी में अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा में भाग लिया और प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (ADM) के माध्यम से सौंपा।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम का नेतृत्व नगर पंचायत पुरकाजी के चेयरमैन जहीर फारुकी ने किया।


पुरकाजी की सड़कों पर उमड़ा देशभक्ति का सैलाब

गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा यात्रा की शुरुआत पुरकाजी रोडवेज बस स्टैंड से हुई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए सूली वाला बाग तक पहुंची।

इस यात्रा में किसान, व्यापारी, युवा, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “हिंदुस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाए।

यात्रा के दौरान जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा की और प्रतिभागियों के लिए खाद्य सामग्री व जलपान की व्यवस्था की। पूरा पुरकाजी क्षेत्र देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।


सूली वाला बाग: इतिहास का गुमनाम अध्याय

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों ने सूली वाला बाग को दमन और आतंक का केंद्र बना दिया था।


यहां अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाने वाले देशभक्तों को पकड़कर सार्वजनिक रूप से फांसी दी जाती थी।

कई क्रांतिकारियों को पेड़ों पर लटकाकर और जमीन में गाड़कर मौत के घाट उतार दिया गया। अंग्रेजों की इस क्रूर नीति का उद्देश्य भारतीय जनता में भय पैदा करना था, ताकि आज़ादी की लड़ाई को दबाया जा सके।

लेकिन देशभक्तों के साहस और बलिदान ने अंग्रेजों की इस नीति को असफल कर दिया और अंततः भारत को स्वतंत्रता मिली।


2016 से जारी संघर्ष, जहीर फारुकी की पहल

सूली वाला बाग के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करने का प्रयास पहली बार वर्ष 2016 में किया गया, जब एडवोकेट जहीर फारुकी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया।

इसके बाद 2016 से 2026 तक हर वर्ष 26 जनवरी और 15 अगस्त को उनके नेतृत्व में सूली वाला बाग तक तिरंगा यात्रा निकाली जाती रही है और सरकार को ज्ञापन सौंपा जाता रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से लगातार प्रयासों के बावजूद अभी तक इस ऐतिहासिक स्थल को शहीद स्थल का दर्जा नहीं मिल पाया है, जिससे जनता में निराशा है।


कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जिन शहीदों के बलिदान से देश आज़ाद हुआ, उनके प्रति सम्मान दिखाना सरकार और समाज दोनों का नैतिक दायित्व है।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को नजरअंदाज किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास से कट जाएंगी।


ज्ञापन में सरकार से प्रमुख मांगें

ज्ञापन में केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्ट मांग की गई कि—

सूली वाला बाग को तत्काल शहीद स्थल घोषित किया जाए।

इस स्थल का संरक्षण और विकास किया जाए।

यहां स्मारक, संग्रहालय और पार्क का निर्माण कराया जाए।

1857 की क्रांति में शहीद हुए सभी क्रांतिकारियों को आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा दिया जाए।


ज्ञापन देने वालों ने कहा कि जिस तरह भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को देश ने सम्मान दिया, उसी तरह सूली वाला बाग में शहीद हुए गुमनाम वीरों को भी सम्मान मिलना चाहिए।


देशभक्ति गीतों ने भरा जोश

कार्यक्रम का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुंबई से आए प्रसिद्ध गायक रहमान अली हुमायूं कबीर ने अपने देशभक्ति गीतों से जनता में जोश भर दिया।

उनके गीतों ने पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
लोगों ने तालियों और नारों के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया।

देशभक्ति गीतों के माध्यम से उन्होंने शहीदों के बलिदान और राष्ट्रप्रेम की भावना को जीवंत कर दिया, जिससे कार्यक्रम एक ऐतिहासिक उत्सव में बदल गया।


पुलिस प्रशासन की सराहनीय भूमिका

इस विशाल आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में पुलिस प्रशासन की भूमिका बेहद सराहनीय रही।

पुरकाजी थाना अध्यक्ष जयवीर सिंह स्वयं सड़कों पर उतरकर व्यवस्था संभालते नजर आए। उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखी।

वहीं, ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु रखने में थाना अध्यक्ष जयवीर सिंह भी सक्रिय भूमिका में दिखाई दिए।
वे स्वयं सड़क पर उतरकर यातायात व्यवस्था संभालते रहे, जिससे हजारों लोगों की भीड़ के बावजूद किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।

स्थानीय जनता ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली की खुले तौर पर प्रशंसा की और कहा कि पुलिस की सतर्कता और सहयोग के कारण पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।


सूली वाला बाग: केवल स्थान नहीं, बल्कि चेतना का प्रतीक

ज्ञापन में कहा गया कि सूली वाला बाग केवल एक स्थान नहीं, बल्कि देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक है।
यह स्थल उन हजारों गुमनाम शहीदों की याद दिलाता है, जिनके नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो सके।

स्वतंत्रता के 77 वर्ष बाद भी इस ऐतिहासिक स्थल को न तो संरक्षित किया गया है और न ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई गई है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित किया जाता है, तो इससे क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को अपने इतिहास को जानने का अवसर मिलेगा।


देश और समाज के लिए ऐतिहासिक निर्णय की मांग

ज्ञापन में अंत में कहा गया कि यदि सरकार सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित करती है, तो यह निर्णय देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

यह न केवल शहीदों के बलिदान को सम्मान देगा, बल्कि समाज में देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सूली वाला बाग को शहीद स्थल घोषित करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि यह देश के इतिहास और शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा।


जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

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