मुज़फ्फरनगर।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर मुज़फ्फरनगर में लोकतंत्र, संविधान और इंसानियत के मूल्यों को समर्पित एक यादगार साहित्यिक आयोजन हुआ। सद्भावना मंच सेक्युलर फ्रंट की ओर से आयोजित “जश्न-ए-जम्हूरियत” मुशायरे में शायरी के माध्यम से एकता, भाईचारे और अमन का सशक्त संदेश दिया गया।
यह कार्यक्रम इंजीनियर नफ़ीस राना के आवास, सूजड़ू चुंगी पर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। मुशायरे की सदारत मशहूर उस्ताद शायर हसीन हैदर जानसठी ने की, जबकि संचालन अल्ताफ मशल ने किया।
कार्यक्रम में आलमी शायर रियाज़ सागर, पूर्व विधायक राव वारिस, सपा ज़िलाध्यक्ष जिया चौधरी और व्यापारी नेता संजय मित्तल विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
इसके अलावा पैग़ाम-ए-इंसानियत के अध्यक्ष आसिफ़ राही, प्रयत्न संस्था के सचिव असद फ़ारूक़ी, उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के ज़िलाध्यक्ष कलीम त्यागी, एडवोकेट कमरुज़्ज़मा, मास्टर इसरार, शाहवेश राव, डॉ. फ़र्रूख हसन, शमीम क़स्सार, गुलफाम अहमद, नदीम मलिक, अरशद अंसारी, मुर्शिद खान, अन्नू राना, इंजीनियर असद पाशा, ज़फरयाब खान सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
लोकतंत्र और इंसानियत पर जोर
मुशायरे में वक्ताओं ने कहा कि जम्हूरियत केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि समानता, न्याय और भाईचारे की सोच है।
हसीन हैदर जानसठी ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन हमारी साझा संस्कृति और संविधान की आत्मा को जीवित रखते हैं।
आलमी शायर रियाज़ सागर ने कहा कि शायरी हमेशा से इंसानियत और अमन का पैग़ाम देती आई है।
पूर्व विधायक राव वारिस ने कहा कि संविधान हमें सेक्युलर और भाईचारे की सोच सिखाता है।
सपा ज़िलाध्यक्ष जिया चौधरी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ते हैं।
व्यापारी नेता संजय मित्तल ने कहा कि मुज़फ्फरनगर की पहचान हमेशा आपसी सौहार्द रही है, जिसे ऐसे आयोजन आगे बढ़ाते हैं।
सम्मान समारोह भी आयोजित
कार्यक्रम के दौरान उर्दू डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष कलीम त्यागी को उर्दू भाषा के लिए उनके योगदान पर शाल ओढ़ाकर और फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया। साथ ही सभी अतिथियों और शायरों को भी शाल और गुलदस्ते भेंट कर सम्मानित किया गया।
संस्था के कन्वीनर गौहर सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे मुशायरे लोकतंत्र को मजबूत करने, भाईचारे को बढ़ावा देने और उर्दू भाषा के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
शायरी में झलकी जम्हूरियत की आवाज
मुशायरे में शायरों ने अपने चुनिंदा अशआर के माध्यम से समाज, इंसानियत और देशप्रेम की भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। रियाज़ सागर, हरी ओम शर्मा, हसीन हैदर जानसठी, सलामत राही, तहसीन कमर, सैफ हैदर, आस मोहम्मद अमीन और अल्ताफ मशल सहित कई शायरों की शायरी ने श्रोताओं को भावुक और प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन देश की एकता, संविधान की मजबूती और आपसी भाईचारे के संकल्प के साथ हुआ। “जश्न-ए-जम्हूरियत” मुशायरा न केवल एक साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि लोकतंत्र और इंसानियत के मूल्यों को मजबूत करने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

