मुजफ्फरनगर। शहर के करीब 99 साल पुराने और ऐतिहासिक इस्लामिया इंटर कॉलेज की बदहाल स्थिति और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सोमवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। सामाजिक कार्यकर्ता एवं छात्र हितैषी शारिक खान ने कॉलेज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस मुद्दे को भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने भी समर्थन दिया है।
रुड़की रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में शारिक खान ने कहा कि कभी जिले की शैक्षणिक पहचान रहा इस्लामिया इंटर कॉलेज आज बदहाली, अव्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार का शिकार हो गया है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर वर्षों से भारी धनराशि खर्च दिखाई गई, लेकिन कॉलेज परिसर में उसका कोई असर दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि आज जब शिक्षा व्यवस्था स्मार्ट क्लास, डिजिटल तकनीक और आधुनिक सुविधाओं की ओर बढ़ रही है, तब इस कॉलेज के हजारों छात्र टूटी बेंचों, जर्जर भवन, टपकती छतों और बदहाल प्रयोगशालाओं में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि कॉलेज में न आधुनिक लाइब्रेरी है, न पर्याप्त कंप्यूटर लैब और न ही विज्ञान विषयों की ऐसी प्रयोगशालाएं, जहां छात्र सही तरीके से प्रैक्टिकल कर सकें। इससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
डीएम को सौंपे ज्ञापन में रखी गईं पांच प्रमुख मांगें
शारिक खान ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में छात्रहित और जनहित से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण मांगें उठाईं।
सबसे पहली मांग कॉलेज की जर्जर और छोटी इमारत को हटाकर छात्रों की संख्या के अनुरूप बहुमंजिला और आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन बनाने की है।
दूसरी मांग कॉलेज परिसर में ही डिग्री कॉलेज शुरू करने की है। उनका कहना है कि इंटर के बाद आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई छात्र मेरठ, सहारनपुर या दिल्ली जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते और मजबूरन अपनी शिक्षा बीच में छोड़ देते हैं।
तीसरी मांग आधुनिक ई-लाइब्रेरी, करीब 100 कंप्यूटरों से लैस कंप्यूटर लैब तथा भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने की है, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
चौथी मांग वर्तमान प्रबंधन समिति को भंग कर जिला प्रशासन की निगरानी में नई और निष्पक्ष प्रबंधन समिति का चुनाव कराने की है। शारिक खान का आरोप है कि वर्तमान समिति की कार्यप्रणाली पर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं।
पांचवीं और सबसे गंभीर मांग कॉलेज में वर्षों से सरकारी अनुदान, फीस और दान की राशि में कथित गड़बड़ी की एसआईटी या आर्थिक अपराध शाखा से जांच कराने की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विकास कार्यों पर कागजों में खर्च दिखाया गया, जबकि जमीन पर अपेक्षित कार्य नहीं हुए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अवैध संपत्ति जब्त करने की भी मांग की गई है।
“लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, व्यवस्था से है”
शारिक खान ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उनका कहना है कि उनकी लड़ाई केवल इस बात के लिए है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को भी वही सुविधाएं मिलें, जो निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उपलब्ध होती हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन को 15 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में जांच शुरू नहीं हुई और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठन मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय पर बड़ा धरना-प्रदर्शन करेंगे।
अभिभावकों ने भी जताई नाराजगी
कॉलेज में पढ़ने वाले कई छात्रों के अभिभावकों ने भी नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि हर साल फीस और विकास शुल्क जमा करने के बावजूद बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। उनका आरोप है कि पीने के साफ पानी की व्यवस्था नहीं है, शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती, बरसात में छत टपकती है और कंप्यूटर लैब केवल दिखावे तक सीमित है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों से लिया जा रहा विकास शुल्क कहां खर्च हो रहा है।
99 साल पुरानी शैक्षणिक विरासत
गौरतलब है कि इस्लामिया इंटर कॉलेज की स्थापना वर्ष 1927 में हुई थी। यह मुजफ्फरनगर के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। वर्तमान समय में यहां तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और इस संस्थान से पढ़कर निकले अनेक विद्यार्थी देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
कॉलेज प्रबंधन का पक्ष नहीं आया सामने
फिलहाल इस पूरे मामले में कॉलेज प्रबंधन समिति की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि ज्ञापन प्राप्त हो गया है और नियमानुसार मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

