मुजफ्फरनगर। सदर तहसील क्षेत्र के गांव गादला में सरकारी तालाब की जमीन पर हुए कथित अतिक्रमण को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाकर भूमि को कब्जा मुक्त कराया। वर्षों से जलभराव की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को राहत भरा कदम बताया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद गांव में जल निकासी व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जिससे लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी का समाधान हो सकेगा।
ग्रामीणों के अनुसार गांव के सरकारी तालाब पर अवैध कब्जा होने के कारण पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई थी। इसका असर यह हुआ कि गांव के मुख्य मार्ग, कई आवासीय क्षेत्रों और सार्वजनिक रास्तों पर लगातार जलभराव रहने लगा। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि प्राथमिक विद्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया था। बच्चों को स्कूल जाने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता था, जबकि बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए चारपाई या ट्रैक्टर-ट्रॉली का सहारा लेना पड़ता था।
ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव की समस्या पिछले करीब छह वर्षों से बनी हुई थी। कई बार अधिकारियों को शिकायतें देने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। पिछले एक सप्ताह से ग्रामीण लगातार जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण होने के कारण गांव का प्राकृतिक जल निकास मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब विभिन्न सामाजिक और हिंदू संगठनों ने भी प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी थी कि यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। बढ़ते दबाव और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शुक्रवार देर शाम प्रशासन हरकत में आया।
शुक्रवार को एसडीएम सदर, तहसीलदार, लेखपाल और राजस्व विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंची। प्रशासन अपने साथ दो बुलडोजर और चार ट्रैक्टर-ट्रॉली भी लेकर आया। अधिकारियों की मौजूदगी में तालाब की भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। कई घंटों तक चली इस कार्रवाई के दौरान कब्जे वाली जमीन को खाली कराया गया और तालाब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का कार्य किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उन्हें बड़ी राहत मिली है, लेकिन गांव में अन्य सरकारी तालाबों और सार्वजनिक भूमि पर हुए कथित अतिक्रमणों की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि शेष अतिक्रमणों पर भी निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
फिलहाल प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था शुरू कर दी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब समाप्त होगी और गांव के बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गों को सामान्य जीवन जीने में राहत मिलेगी। यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और ग्रामीणों की बुनियादी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

