मुज़फ्फरनगर:
मुज़फ्फरनगर के खालापार निवासी 17 वर्षीय नाबालिग हुजेफा उर्फ मन्नू के लापता होने के 23 दिन बाद भी उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है। बेटे के इंतजार में परिवार की उम्मीदें अब दर्द में बदलती जा रही हैं। सोमवार को जब परिजनों ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयान की तो मां, बहनें और अन्य सदस्य फूट-फूट कर रो पड़े। परिवार का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ अपने बेटे का पता चाहिए, चाहे वह जिंदा मिले या फिर उसकी लाश ही क्यों न मिले।
परिजनों के अनुसार 16 मई को हुजेफा अपने परिचित अबुजर, सुहैल उर्फ रिहान और आहद के साथ चितौड़ा झाल पर नहाने के लिए गया था। शाम के समय तीनों युवक हुजेफा की मोटरसाइकिल लेकर उसके घर पहुंचे और परिवार को बताया कि हुजेफा नहर में डूब गया है। सूचना मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया और मामले में थाना सिखेड़ा में मुकदमा दर्ज कराया गया।
परिवार का आरोप है कि घटना के बाद शुरुआती दिनों में नहर में गंभीरता से तलाश अभियान नहीं चलाया गया। उनका कहना है कि अगर समय रहते विशेषज्ञ गोताखोरों और तकनीकी संसाधनों की मदद ली जाती तो शायद कोई सुराग मिल सकता था। परिजनों का यह भी आरोप है कि जिन युवकों के साथ हुजेफा गया था, उनसे गहराई से पूछताछ नहीं की गई, जिससे मामले के कई महत्वपूर्ण सवाल आज भी अनुत्तरित हैं।
23 दिन बीत जाने के बावजूद न तो नहर से कोई शव बरामद हुआ है और न ही हुजेफा के जीवित होने या किसी अन्य घटना का कोई ठोस प्रमाण सामने आया है। इसी वजह से परिवार लगातार मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग कर रहा है।
हुजेफा के पिता मुमताज अहमद अपने परिवार के साथ कई बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं। उन्होंने थाना सिखेड़ा, सीओ मंडी राजू कुमार साव, एसपी सिटी अमृत जैन तथा एसएसपी संजय कुमार वर्मा से मुलाकात कर मामले की जांच किसी अन्य थाने को सौंपने और जिन युवकों के साथ हुजेफा गया था, उन्हें पुलिस रिमांड पर लेकर सख्ती से पूछताछ करने की मांग की है।
सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान परिवार का दर्द साफ दिखाई दिया। हुजेफा की मां नरगिस और बहनें अमरीन तथा बुसरा परवीन अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने कहा कि पिछले 23 दिनों से पूरा परिवार हर पल अपने बेटे और भाई के लौटने का इंतजार कर रहा है। मां ने रोते हुए कहा कि उनका परिवार अब सिर्फ एक जवाब चाहता है। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि अगर उनका बेटा जिंदा है तो उसे उनके पास लाया जाए और अगर उसके साथ कोई अनहोनी हो चुकी है तो कम से कम उसका शव ही परिवार को सौंप दिया जाए, ताकि वे उसे आखिरी बार देख सकें।
परिवार की यह दर्दभरी पुकार अब प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। आखिर 23 दिन बीत जाने के बाद भी नाबालिग हुजेफा का कोई सुराग क्यों नहीं मिल पाया? यह सवाल न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लोगों को परेशान कर रहा है। परिजन अब जल्द से जल्द मामले के खुलासे और अपने बेटे के बारे में सच्चाई सामने आने की मांग कर रहे हैं।

