Friday, October 2, 2026

15 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में फांसी!



मुजफ्फरनगर। चरथावल क्षेत्र में बकरीद के दिन मां और मासूम बेटे की निर्मम हत्या के 15 साल पुराने चर्चित मामले में अदालत ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इसे अत्यंत जघन्य अपराध मानते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ा फैसला दिया।

अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने बरेली निवासी रईस उर्फ जहूर हसन पुत्र नत्थू बक्श को मृत्युदंड की सजा सुनाई। आरोपी को मां राजेश देवी (30) और उनके छह वर्षीय बेटे हिमांशु की ईंट से कूचकर हत्या करने का दोषी पाया गया।

अभियोजन के अनुसार, चरथावल थाना क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी सुरेश की पत्नी राजेश देवी अपने छह वर्षीय पुत्र हिमांशु के साथ सात नवंबर 2011 को रुड़की जाने के लिए घर से निकली थीं। इसके बाद दोनों रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला।

घटना के छह दिन बाद 13 नवंबर 2011 को चरथावल क्षेत्र के जंगल में एक महिला और बच्चे के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए थे। सूचना मिलने पर परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और 14 नवंबर को शवों की पहचान राजेश देवी और उनके बेटे हिमांशु के रूप में की। इस दोहरे हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रईस उर्फ जहूर हसन के मृतका से अवैध संबंध थे। जांच एजेंसियों के अनुसार महिला आरोपी के साथ रहने का दबाव बना रही थी, जिसके चलते आरोपी ने साजिश रचकर मां-बेटे की हत्या कर दी। हत्या के बाद शवों को जंगल में फेंक दिया गया था ताकि पहचान और साक्ष्य छिपाए जा सकें।

पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए आरोपी को 11 दिसंबर 2011 को गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में नौ महत्वपूर्ण गवाह पेश किए, जिनकी गवाही और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत ने निर्णायक माना।

सुनवाई के लिए आरोपी को बरेली जेल से अदालत में पेश किया गया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है।

जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने मामले को गंभीरता से न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और पुलिस विवेचना के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

करीब 15 वर्षों तक चले इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि जघन्य अपराध करने वालों को कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है और देर से ही सही, न्याय अवश्य मिलता है।

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