Thursday, October 1, 2026

13 साल के इंतजार के बाद मिली मुक्ति: हरीश राणा को नम आंखों से विदाई।

नई दिल्ली:
देश के पहले ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (इच्छामृत्यु) मामले से जुड़े हरीश राणा को आखिरकार लंबी पीड़ा के बाद शांति मिल गई। मंगलवार शाम उनका अंतिम संस्कार दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट पर किया गया। इस दौरान माहौल बेहद भावुक और गंभीर बना रहा, जहां परिवार, दोस्त और शुभचिंतक बड़ी संख्या में उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

हरीश राणा ने हाल ही में एम्स में अंतिम सांस ली थी। वह पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और इस दौरान उनका परिवार लगातार उनकी सेवा में लगा रहा। उनकी अंतिम यात्रा धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल में निकाली गई। अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के साथ-साथ ब्रह्माकुमारी संस्थान की परंपराओं के अनुसार किया गया, जिसमें मंत्रोच्चार और शांति प्रार्थनाएं शामिल रहीं।

श्मशान घाट पर मौजूद लोगों ने हरीश के परिवार के धैर्य और समर्पण की जमकर सराहना की। परिवार ने वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में उनकी देखभाल की और अंत में कानूनी प्रक्रिया के जरिए उन्हें गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार दिलाया। यह मामला देश में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

अंतिम विदाई के समय परिवार के सदस्य भावुक नजर आए और नम आंखों से हरीश को अलविदा कहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

हरीश राणा की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, परिवार के समर्पण और गरिमा के साथ जीवन के अंत के अधिकार की भी कहानी बन गई है।

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