मुजफ्फरनगर:
जनपद में कानून-व्यवस्था, हिंदू नेताओं की हत्याओं और बढ़ती गोतस्करी के मुद्दे को लेकर शिवसेना (पश्चिमी उत्तर प्रदेश इकाई) ने शनिवार को जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन ने इन घटनाओं को बेहद गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि अगर जल्द सख्त कदम नहीं उठाए गए तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन में शिवसेना ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई हिंदू नेताओं की हत्या हुई है, जिससे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है। संगठन ने कमलेश तिवारी, चंदन गुप्ता, कन्हैया लाल, तरुण खटीक और चंद्रशेखर उर्फ फरसे वाले बाबा जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और इन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।
संगठन का आरोप है कि इन घटनाओं का विरोध करने वाले हिंदूवादी कार्यकर्ताओं के साथ कई बार पुलिस सख्ती करती है और उनके साथ गलत व्यवहार होता है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
गोकशी और गोतस्करी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाते हुए शिवसेना ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सहित हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर गायों की तस्करी हो रही है। उनका कहना है कि यह एक संगठित अपराध बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई कई बार सिर्फ औपचारिक रह जाती है, जिससे तस्करों के हौसले बुलंद हैं।
ज्ञापन में शिवसेना ने चार मुख्य मांगें रखीं—
गाय को राष्ट्र माता घोषित किया जाए और गोहत्या को संगठित अपराध की श्रेणी में लाया जाए।
जिन हिंदू नेताओं को खतरा है, उन्हें सुरक्षा दी जाए और मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता मिले।
विरोध में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं और गोरक्षकों को रिहा कर उनके मुकदमे वापस लिए जाएं।
गोतस्करी रोकने के लिए एक विशेष सशक्त टीम बनाई जाए, जिसे कड़े अधिकार दिए जाएं।
शिवसेना के पश्चिमी उत्तर प्रदेश उप प्रमुख प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक संतुलन का भी बड़ा मुद्दा है। सरकार को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
वहीं जिला प्रमुख बिट्टू सिखेड़ा ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उन्हें न्याय और आर्थिक मदद मिलना जरूरी है। साथ ही विरोध करने वालों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।
ज्ञापन के अंत में शिवसेना ने साफ कर दिया कि फिलहाल वह शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रही है, लेकिन यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़े स्तर पर जनआंदोलन करेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ज्ञापन देने के दौरान कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

