नई दिल्ली: संसद में बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने देश को एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं और भारत को “कोरोना काल जैसे मुश्किल दौर” के लिए हमेशा तैयार रहना होगा। उनका इशारा सिर्फ स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं था, बल्कि वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संकट की ओर भी था।
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर LPG (रसोई गैस) से जुड़े संकट का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों—जैसे युद्ध, आपूर्ति बाधाएं और महंगाई—का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और जनता दोनों को सतर्क रहना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान भारत ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया—स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव, रोजगार संकट और सप्लाई चेन में रुकावटें। लेकिन उसी दौर से सीख लेते हुए अब देश को भविष्य के लिए बेहतर तैयारी करनी होगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान कम से कम हो।
LPG संकट को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई की कमी से आम लोगों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार जरूरत पड़ने पर राहत देने के लिए तैयार है और पहले की तरह गरीब और मध्यम वर्ग की मदद के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया और कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में खुद को मजबूत बनाना होगा, ताकि बाहरी संकटों का असर कम हो। उन्होंने यह भी कहा कि जनता को भी जिम्मेदारी निभानी होगी—ऊर्जा की बचत और समझदारी से इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
इस बयान को विशेषज्ञ एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं कि आने वाले समय में आर्थिक और ऊर्जा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में सरकार की तैयारी के साथ-साथ लोगों की जागरूकता भी उतनी ही अहम होगी।

