क्या मुजफ्फरनगर में मरीजों की जान से खिलवाड़ होता रहा और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे?
मुजफ्फरनगर में ‘जहर बनता खून’! बिना जांच ब्लड सप्लाई का सनसनीखेज खुलासा”
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। मुजफ्फरनगर समेत 13 जिलों में ब्लड बैंकों पर की गई सख्त जांच में ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। जिन ब्लड बैंकों पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी थी, वहीं से बिना जांच के खून सप्लाई किया जा रहा था।
सबसे ज्यादा चिंता की बात मुजफ्फरनगर को लेकर सामने आई है, जहां कई ब्लड बैंक नियमों को ताक पर रखकर काम करते पाए गए। यहां मरीजों को दिया जा रहा खून न तो जरूरी मेडिकल जांच से गुजर रहा था और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। यानी जो खून जीवन बचाने के लिए दिया जाता है, वही गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जब छापेमारी की तो कई जगह हालात बेहद खराब मिले। रिकॉर्ड अधूरे थे, टेस्टिंग मशीनें या तो बंद पड़ी थीं या उनका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ केंद्रों पर HIV, हेपेटाइटिस B और C जैसी खतरनाक बीमारियों की जांच के बिना ही खून मरीजों को दिया जा रहा था।
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विभाग ने तुरंत एक्शन लेते हुए 7 ब्लड बैंकों को बंद कर दिया है। इसके अलावा कई अन्य केंद्रों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, आगे और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुजफ्फरनगर में इस पूरे मामले ने लोगों के बीच डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। आम लोगों का कहना है कि जब अस्पताल और ब्लड बैंक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो मरीज आखिर किस पर भरोसा करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बिना जांच के खून चढ़ाना सीधे-सीधे जान जोखिम में डालने जैसा है। इससे HIV, हेपेटाइटिस, सिफलिस जैसी जानलेवा बीमारियां फैल सकती हैं, जो जिंदगी भर का खतरा बन जाती हैं।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब पूरे जिले में ब्लड बैंकों की दोबारा जांच की तैयारी में है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जो भी संस्था या व्यक्ति इस लापरवाही में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
⚠️ बड़ा सवाल:
क्या मुजफ्फरनगर में मरीजों की जान से खिलवाड़ होता रहा और जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे रहे?
यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी नाकामी है। अगर समय रहते यह खुलासा नहीं होता, तो न जाने कितनी जिंदगियां खतरे में पड़ सकती थीं। अब जरूरत है सख्त कार्रवाई, पारदर्शिता और लगातार निगरानी की—ताकि “जीवन देने वाला खून” कभी “मौत का कारण” न बने।
जनपद मुजफ्फरनगर से सचनामा न्यूज़ के लिए संवाददाता तनवीर मलिक की रिपोर्ट

